Sunder Savaiya Granth : Sunder Vilaas

Ramesh Chnadra Mishra

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  • Year: 1993

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Jagat Ram & Sons

  • ISBN No: 111-11-1111-111-1

निर्गुण धारा के रचनाकारों में सुंदरदास की अनुभूति सर्वथा विवेक-संचालित, उनका चिंतन सामान्य रूप से शास्त्र मर्यादित, उनका अभिव्यंजना व्यापार जीवनानुभवों से समृद्ध तथा उनकी भाषा पांडित्य से परिष्कृत है। उन्होंने वाणी के संयम, भावना की सघनता और चिंतन की व्यापकता द्वारा अपनी रचनाओं को ऐसी साहित्यिक गरिमा प्रदान की है कि ज्ञानाश्ररी शाखा के सभी कवि उनके रचना रूप के समक्ष बौने प्रतीत होते हैं। डाॅ. रजेशचन्द्र मिश्र ने ‘सुन्दर सवैया ग्रंथ’ को प्रकाश में लाकर सभी प्रकार के पाठकों का उपकार किया है। डाॅ. मिश्र ने उपयोगी भूमिका के साथ प्रत्येक सवैये से सम्बद्ध शब्दों का अर्थ अथवा अभिप्राय स्पष्ट करके केवल साधारण पाठक के लिए ही सुन्दरदास की रचनाओं को सम्प्रेषणीय नहीं बनाया, सन्त-काव्य के विशेषज्ञों एव शोधार्थियों की शंकाओं के समाधान के लिए भी यह सफल प्रयास किया है। इन्होंने इस ग्रंथ को इस प्रकार से सम्पादित करके हिंदी-जगत् को अपने संत-काव्य विषयक विस्तृत एवं गहन अध्ययन का जो लाभ पहुंचाया है, वह मुक्तकंठ से सराहनीय है।
—प्रो. महेन्द्रकुमार

Ramesh Chnadra Mishra


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