Sitaron Ke Akshar Aur Kirno Ki Bhasha

Amrita Pritam

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  • Year: 2013

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170167587

यूँ तो कुदरत की यह इबारत कई तरह के
कागजों पर लिखी मिलती है-

इन्सान के हाथ-पैरों से लेकर उसके नख-शिख को
भी वह कागजों की तरह इस्तेमाल
करती है और धूप-छांव की हर गर्दिश में से
गुजरती हुई वह पशुओं-पंछियों 
की आवाजों तक को भी अपने कागज बना लेती
है । पर उसके विज्ञान को
एक खास पहलू से जानने के लिए, मैंने
सिर्फ वह कागज चुने-
इन्सान की सोई हुई आँखो के सपने, जिन पर
कुदरत की लिखी हुई इबारत
को हर इंसान देखता है, पर पढने में
समर्थ नहीं होता ... 

Amrita Pritam

अमृता प्रीतम
(वास्तविक नाम-अमृत कौर)
जन्मतिथि : 31 अगस्त, 1919
जन्मस्थान : गुजरांवाला (अब पाकिस्तान में)
प्रकाशित कृतियाँ : उनके हस्ताक्षर, ना राधा ना रुक्मणी, कम्मी और नंदा, रतना और चेतना (उपन्यास); दस प्रतिनिधि कहानियां, अलिफ लैला : हजार दास्तान, कच्चे रेशम सी लड़की (कहानी-संग्रह); रसीदी टिकट (आत्मकथा); खामोशी से पहले (कविता-संग्रह) मेरे साक्षात्कार (सं० : अस्मा सलीम तथा श्याम सुशील), मन मंथन की गाथा (सं० : इमरोज) (साक्षात्कार/लकरीरें); एक थी सारा, काया के दामन में, शक्तिकणों की लीला, काल-चेतना, अज्ञात का निमंत्रण, सितारों के संकेत, सपनों की नीली सी लकीर, अनंत नाम जिज्ञासा (आध्यात्मिक सत्यकथाएँ); सितारों के अक्षर किरनों की भाषा, मन मिर्जा तन साहिबाँ, अक्षर कुण्डली, वर्जित बाग की गाथा (सं० : अमृता प्रीतम), बेवतना (सं० : अमृता प्रीतम) (चिंतन/संस्मरण/रेखाचित्र आदि)।
पुरस्कार-सम्मान : साहित्य अकादेमी पुरस्कार 'सुनेहड़े' (कविता-संग्रह : 1956), भारत के राष्ट्रपति द्वारा पदमश्री सम्मान (1969), भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार 'कागज ते कैनवस' (कविता-संग्रह :  1981) तथा पदमबिभूषण सम्मान (2004) के अलावा अन्य बहुत-से पुरस्कारों-सम्मानों से अलंकृत ।

स्मृति-शेष : 31 अक्तूबर, 2005

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