Pustak Ki Niyati

Dr. Pravesh Saxena

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  • Year: 2019

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Arya Prakashan Mandal

  • ISBN No: 9788193432532

इक्कीसवीं सदी के इस साइबर युग में जबकि इंटरनेट, किंडल, ई-बुक आदि का प्रचलन बढ़ता जा रहा है तो पुस्तक के भविष्य को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है। क्या होगा मुद्रित पुस्तक का भविष्य? क्या वह अज़ायबघर की एक वस्तु बनकर रह जाने वाली है? फिर पुस्तक की नियति के बारे में और भी प्रश्न मन में घुमड़ने लगते हैं? कैसे वह अस्तित्व में आई, कैसे मनुष्य ने लिखना सीखा, प्रथम पुस्तक प्रस्तर पर लिखी गई या भोजपत्र पर, काग़ज़   कब, कहाँ से आया? आदि-आदि। प्रथम मुद्रित पुस्तक किस भाषा में थी, क्या नाम था  उसका? अर्थात् ‘पुस्तक की नियति’ को लेकर उसके ‘कल, आज और कल’ से संबंधित प्रश्न अगणित हैं। पुस्तक के जन्म और विकास की गाथा के सूत्र जहाँ एक साथ मिल सकें-ऐसी कोई ‘पुस्तक’ पुस्तक पर नहीं मिलती है। डॉ. प्रवेश सक्सेना ने अत्यंत परिश्रमपूर्वक शोधकार्य करके इन सूत्रों को एकत्रित करने का प्रयास किया है। उनका यह कार्य भारतीय और वैश्विक दोनों संदर्भों में ‘पुस्तक की नियति’ को जानने-समझने की कोशिश है।
पुस्तक के मूल, उसके लेखक, पाठक और यहाँ तक कि लेखन सामग्री और पुस्तकालयों तक पर विस्तार से चर्चा इस  पुस्तक   में की गई है। ई-बुक का चमत्कारपूर्ण संसार यहाँ वर्णित है तो समय-समय पर विद्वानों द्वारा पुस्तक के महत्त्व के विषय में टिप्पणियाँ भी यहाँ संगृहीत हैं। पुस्तक को लेकर संस्कृत और हिंदी की कुछ कविताएँ भी संकलित की गई हैं। बहुत ही रोचक अंदाज़ में लिखी गई इस पुस्तक में पुस्तक से संबद्ध कुछ रोचक तथ्य भी मौजूद हैं। कुल मिलकर कहें तो यह ‘पुस्तक’ इस क्षेत्र में एक बड़े शून्य को भरती है। लेखिका पूर्णतः आशावादी हैं ‘पुस्तक की नियति’ के बारे में। पुस्तक थी, है और हमेशा रहेगी।

Dr. Pravesh Saxena

डा. प्रवेश सक्सेना
शिक्षा-दीक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से। सम्प्रति दिल्ली विश्वविद्यालय के ज़ाकिर हुसैन पोस्ट ग्रेजुएट कालेज (सान्ध्य), नई दिल्ली में संस्कृत विभाग में रीडर-पद पर अध्यापनरत।
लेखन-कार्य
हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेज़ी भाषाओं में। कविता, कहानी, लेख, शोधपरक लेखन, राष्ट्रीय स्तर के प्रसिद्ध पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। कविताओं, वार्ताओं आदि का रेडियो, दूरदर्शन पर प्रसारण। अनेक अखिल भारतीय सम्मेलनों एवं काव्यगोष्ठियों में सहभागिता। अन्तर्राष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलनों में शोध-पत्र प्रस्तुत। महाविद्यालयों, विद्यालयों, अन्य धार्मिक, सांस्कृतिक संस्थाओं में भाषण-व्याख्यान। कुछ वर्ष तक वेद संस्थान की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘वेद-सविता’ का सम्पादन।
प्रकाशित पुस्तकें
'Aditya From The Rigveda To The Upanisads’ ‘अनुभूति’, ‘राष्ट्रदेवता’ (संस्कृत कविता), ‘मरीचिका’, ‘अनुष्का’ (सम्पादित), ‘शब्दयायावर’, ‘हँसता-गाता बचपन’ (हिन्दी कविता), ‘संस्कृत, संस्कृति और पर्यावरण’, ‘वेदों में पर्यावरण संरक्षण’, ‘अवसाद से प्रसाद की ओर’ (वैदिक मनोविज्ञान), ‘अन्तिम प्रार्थना’ (मृत्यु सम्बन्धी विवेचन), ‘वैदिक वाङ्मय में प्राण’ (सम्पादित), ‘वेदों में क्या है?’, ‘भारतीय दर्शनों में क्या है?’, ‘श्रुतिनैवेद्यम्’, ‘नाट्यसूक्ति- समुच्चय’, ‘चाणक्यसूत्राम्’, ‘ऋग्वेद: युवाओं के लिए’, ‘सामवेद: युवाओं के लिए’ तथा ‘यजुर्वेद: युवाओं के लिए’।
पुरस्कार एवं सम्मान : दिल्ली संस्कृत अकादमी, इन्द्रप्रस्थ साहित्य भारती, भावना कला केन्द्रादि द्वारा, हिन्दी अकादमी द्वारा।

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