Hindi Vyakaran : Paaribhaasik Shabdkosh

Ramraj Pal Dwivedi

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  • Year: 2010

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Parmeshwari Prakashan

  • ISBN No: 9788188121915

हिन्दी-व्याकरण : पारिभाषिक शब्दकोश
हिन्दी की मानकता पर विचार बहुत विलम्ब से शुरू हुआ। दशकों तक एकाधिक हिन्दियाँ चलती रहीं। व्याकरण किस ‘हिन्दी’ के आधार पर बने, किसका नियमन करे, किससे उदाहरण ले, किस रूप की संस्तुति करे—यह तनाव उसे बरसों सालता रहा। छिटपुट अपवादों को छोड़ आज हिन्दी की मानकता प्रायः थिर हो चुकी है। हिन्दी-व्याकरण की पारिभाषिक शब्दावली भी एकरूपता एवं स्थैर्य की प्रक्रिया में है। शोधों एवं अन्तरभाषीय सम्बन्धों के परिणामस्वरूप नये-नये तथ्य एवं शब्द आ रहे हैं, पुराने छीज रहे हैं। शब्दशास्त्र का नियम ही है यह। प्रस्तुत ग्रंथ में स्थिर हो चुके एवं नवागत सभी शब्द दिए गए हैं। विवेचन में, यथासम्भव, बहुमान्य शब्द लिया गया है। मूल शब्द के साथ ही भेदोपभेद भी गिना दिए गए हैं; अन्यत्र उन भेदों-प्रभेदों को भी मूल शब्द की भाँति ही विवेचित किया गया है।
प्रस्तुत कोश को अद्यतन बनाने के लिए हिन्दी-व्याकरण की परिधि के इधर-उधर मँडराते अनेकानेक पारिभाषिक शब्दों को प्रथम बार समेटने का प्रयास किया गया है। इस प्रकार निर्धारक, भाषाभेद, मात्रा, रंजक क्रिया, विरामचिन्ह (मुख्यतः योजक चिन्ह), व्याकरणिक कोटियाँ, शून्य प्रत्यय, हिन्दी अक्षर, हिन्दी ध्वनियाँ आदि हिन्दी-व्याकरण के अनिवार्य अंग, जो अब तक दूर-दूर छिटके पड़े थे, कोश की सीमा का आदर करते हुए, एक ही जगह विवेचित किए गए हैं। हिन्दी में यह पहली बार हुआ है जो इस ‘कोश’ का वैशेष्य है।

Ramraj Pal Dwivedi

रामरजपाल द्विवेदी
जन्म : 10 अप्रैल, 1932, चाँदपुर, निकट एटा (उ.प्र.)।
शिक्षा : एम.ए. (अँगरेज़ी, हिन्दी), पी-एच.डी., सम्पादन- कला विशारद।
शिक्षण-कार्य : अँगरेज़ी 13 वर्ष, हिन्दी 26 वर्ष। एम.एम.एच. कॉलेज,  ग़ाज़ियाबाद  से  रीडर  पद  से  सेवानिवृत्त।
रिसर्च अनुभव : 1969 से अद्यावधि। निर्देशन में पी-एच.डी. उपाधि प्राप्तकर्ता 15.
प्रकाशित कार्य : हाई स्कूल के पश्चात् ही मान्य पत्रिकाओं (‘अजन्ता’, ‘आदर्श’, ‘कादम्बिनी’, ‘सा. हिन्दुस्तान’, ‘विशाल भारत’, ‘प्रेरणा’, ‘राष्ट्रधर्म’, ‘साहित्य सन्देश’, ‘सरस्वती संवाद’, ‘समीक्षा’, ‘सम्मेलन पत्रिका’, ‘परिषद् पत्रिका’, ‘हिन्दुस्तानी’, ‘सप्तसिंधु’ आदि) में प्रकाशन। अनेक लेखों के अतिरिक्त 14 हिन्दी एवं 6 अँगरेज़ी पुस्तकें, 18 शोधपत्र (मुख्यतः भाषाविषयक) प्रकाशित।
प्रमुख चर्चित पुस्तकें : ‘प्रसाद और पन्त का तुलनात्मक विवेचन’, ‘कविवर पन्त और उनका आधुनिक कवि’, ‘महाकवि रत्नाकर और उद्धवशतक’, ‘काश ! हम भी स्त्री होते’ (हास्य-व्यंग्य), ‘ब्रजी एवं कनउजी की सन्धिस्थलीय बोली की रूपप्रक्रिया’ (भाषाशास्त्र), ‘हिन्दी सही लिखिए’ (पुरस्कृत), ‘झरोखे अतीत के (कविता-संग्रह), ‘हिन्दी व्याकरणिक शब्दकोश’ (पुरस्कृत)।
सम्प्रति : जारी कार्य : ‘और हम भी दिल्ली आए’ (हास्य- व्यंग्य), ‘अँगरेज़ी सही लिखिए’, ‘ब्रजबोली कोश (ब्रज के बोलीगत मरणासन्न शब्दों का संकलन-सम्पादन)

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