Bhartiya Sant Parampara

Baldev Vanshi

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  • Year: 2012

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9789380146577

भारतीय संत परंपरा
भावी विश्व का सच्चा विकास आर्थिक भूमंडलीकरण के साथ-साथ नैतिक-आध्यात्मिक चेतना को समाहित कर पूर्ण व संतुलित बनाया जा सकता है। आज भारत तथा समूचे विश्व को केवल संत ही बचा सकते हैं, क्योंकि वे केवल मनुष्य की नैतिक-आध्यात्मिक चेतना के प्रति बद्ध हैं, किन्हीं धर्मग्रंथों, संप्रदायों से नहीं।
महात्मा बुद्ध ने जो उपदेश दिए वे आधुनिक मानवता के लिए अत्यधिक उपयोगी हैं, बल्कि वे उत्तरोत्तर अधिक प्रासंगिक होते जा रहे हैं। लोभ, मोह, घृणा की आग में व्यक्ति, समूह और देश जल-झुलस रहे हैं। सभी जगह जड़वाद, भौतिकवाद के परिणामस्वरूप भोगवाद, तृष्णा, लिप्सा, संग्रह की असीम लालसा के वशीभूत जगत् जलता हुआ जंगल बन चुका है। इनसे बचने के उपदेश तथागत ने दिए थे। बौद्ध संस्कृति का यह सार्वभौम आधार सब देशों-समाजों को ग्राह्य, प्रीतिकर एवं स्पृहणीय लगेगा। फ्रांस के दार्शनिक बर्गसां, जर्मनी के दार्शनिक कांट ने इसे तात्त्विक दृष्टि से उपयोगी बताया है तो चेतनाद्वैतवादी ब्रेडले ने बुद्ध के तर्कवाद-विज्ञानवाद को युग-व्याधियों का उपयुक्त निदान माना है। 
महात्मा बुद्ध के मूल उपदेशों में प्रज्ञा, शील, ध्यान पातंजलि के ध्यान-योग के अति निकट हैं तो मध्ययुगीन संतों की वाणी में इन्हीं का विस्तार है। अतः ‘भारतीय संत परंपरा’ वर्तमान विश्व मानव के लिए अमृततुल्य है।

Baldev Vanshi

डॉ० बलदेव वंशी
जन्म : 1 जून, 1938, मुलतान (अब पाकिस्तान में)
एम०ए० हिंदी, पी-एच०डी० । हिंदी के सुप्रतिष्ठित कवि, आलोचक, पत्रकार और संपादक । ग्यारह कविता-संग्रह, पाँच आलोचना पुस्तकें सहित पैंतीस से ऊपर पुस्तके प्रकाशित । विभिन्न भाषा अकादमियों, साहित्यिक संस्थाओं, विश्वविद्यालयों द्वारा सम्मानित । छ: पुस्तकें केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा पुरस्कृत । 'कहत कबीर कबीर' पर 'कबीर शिखर सम्मान' प्राप्त । संत मलूकदास की मूल वाणी को देवनागरी में लाने के उपलक्ष्य में प्रथम श्री मलूक रत्न पुरस्कार (1999) । रचनाएँ विश्वविद्यालय पाठयक्रमों में निर्धारित क्या अनेक भाषाओं में अनूदित ।
'विश्व रामायण सम्मलेन' क्तथा कबीर चेतना यात्रा' के सिलसिले में मॉरीशस, हालैंड, इंग्लैंड, बैल्जियम, नेपाल आदि विदेशों में और देश में यात्राएँ । 'अखिल भारतीय भाषा संरक्षण संगठन' के संस्थापक अध्यक्ष, विश्व कबीरपंथी महासभा के अध्यक्ष, दादू शिखर सम्मान  समिति के संयोज़क-निदेशक ।
'कहत कबीर', 'दादू जीवन दर्शन', 'संत कवि  दादू', ‘श्री मलूक वाणी' (मूल रूप में प्रथमत: प्रकाश्य) पुस्तकों के लेखक-संपादक ।

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