Megha Megha Pani De

Madhukar Singh

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  • Year: 2011

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Arya Prakashan Mandal

  • ISBN No: 978-81-88118-48-9

मेघा-मेघा पानी दे
(एक प्राचीन ऐतिहासिक कथा पर आधारित नाटक)

गांव की एक डगर। सामने बड़ा-सा चरागाह है। कृष्ण एक ऊंचे टीेले पर बैठा है। तीन-चार लड़के कुछ दूरी पर एक-दूसरे से कटे हुए बैठे हैं। कृष्ण की बंसी के स्वर धीरे-धीरे तेज होते जा रहे हैं।

Madhukar Singh

मधुकर सिंह

जन्म : 2 जनवरी, 1934
जन्म-स्थान : बिहार का ग्रामीण अंचल
पेशे से अध्यापक, लेकिन आम आदमी की लडाई का बीडा उठाए रहते है । कहानियों में ग्रामीण जीवन और हरिजनों के दर्द को मुखर स्वर मिला है । कहानियां देश की सभी प्रमुख पत्रिकाओ में प्रकाशित-समादृत । कई कहानियाँ देशी-विदेशी भाषाओं से अनूदित । कुछ एक कहानियां रेडियो-दूरदर्शन  कार्यक्रम में प्रमुख स्थान पा चुकी है ।
प्रकाशन : 'पूरा सन्नाटा', 'भाई का जख्म', 'अगनुकापड़', 'पहला पाठ', 'माई', ‘दस प्रतिनिधि कहानियाँ', 'माइकल जैक्सन की टोपी' (कहानी-संग्रह); 'सबसे बडा छल', 'सोनभद्र की राधा', 'सीताराम नमस्कार', 'सहदेव राम का इस्तीफा', 'जंगली सुअर', 'मनबोध बाबू', ‘बेमतलब बदनाम जिंदगियाँ', 'उत्तरगाथा', 'अगिन देवी' (उपन्यास); 'मुंशी प्रेमचंद', 'मेघा-मेघा पानी दे' इत्यादि ।

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