Upnivesh

Narayan Gangopadhyaya

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  • Year: 1997

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 3300110011124

उपनिवेश
नदी-मातृक्र देश बंगाल-पश्चिम और पूर्व की  सीमाओं से मुक्ति-संयुक्त और सम्पूर्ण बंगाल के उस अछूते क्षेत्र विशेष-चर-इस्माइल की एक अदभुत गाथा जिसे पुर्तगाली ज़ल-टस्युओं। में बसाया था, नदी के मुहाने पर, सुन्दर वन से जुडा हुआ ।
प्रकृति के साथ मनुष्य के संघर्ष की रोमांचपूर्ण जीवन-यात्रा की लोमहर्षक कहानी सभ्य और सहज के मानसिक द्वन्द्व भी वर्गगत संघर्ष का एक अनूठा दस्तावेज विभिन्न नस्लो के विविध चरित्रों को मनोमुग्धकारी मंजुषा आप इस उपन्यास में पायेंगे ।
द्वितीय महायुद्ध में जमता त्रास और आत्म रक्षा के लिए एकता और संघर्ष भी गुहार की राष्ट्रीय तस्वीर की सजीव रूपरेखा वास्तव ये इस उपन्यास को बंगला उपन्यासों में क्लासिक का दर्जा सही ही प्राप्त है । 
रहस्य, रोमांच, हास्य, करुणा, प्रेम वासना-क्या कुछ नहीँ है इसमें ।

Narayan Gangopadhyaya

नारायण  गंगोपाध्याय
आपका जन्म 1918 में हुआ ।  कवि के रूप  में 12-13 वर्ष की आयु में ही साहित्य-प्रवेश । बंगला साहित्य को आप दर्जनों उपन्यास और सैंकड़ों कहानियों का योगदान दे  चुके हैं ।  अपनी मार्जित भाषा, अनोखे काव्यात्मक वर्णन और प्रगतिशील विचारो के लिए आप बंगला साहित्य में विख्यात है ।
आरम्भ से ही राजनीतिक आन्दोलन में विशेष रूचि रही ।  1936-37 के आन्दोलन में जेल-यात्रा की । स्वतंत्रता आन्दालन के माध्यम से आप मार्क्सवाद के निकट आये और  मानव के जीवन-संघर्ष ने आपकी कृत्तियों में स्थायी श्यान प्राप्त किया ।
प्रकाशित कृतियां  :
उपनिवेश, पट संचार (मसाले और मसीहा), कृष्णा-पक्ष, गंधराज़, जन्मान्तर, तिमिर-तीर्थ, दु शासन, वन ज्योत्स्ना, विदिशा, मन्द्रमुख़र,  शिलालिपि, सृर्य-सारथी, सम्राट ओ श्रेष्ठी, स्वर्ण सीता, सागरिका, लाल माटी, अमावस्यार गान  आलोकपर्णा आदि ।

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