Tan Man

Shivram Karant

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  • Year: 1995

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 1111111111111

भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता शिवराम कारंत का अत्यन्त लोकप्रिय उपन्यास 'तन मन' कन्नड़ साहित्य की अनुपम कृति है ।
चिरन्तन काल से विवाहेतर स्त्री-पुरुष सम्बन्ध विषयक प्रवृत्ति ने 'विश्व के सबसे पुराने पेशे' को जन्म दिया । यह पेशा आज भी जीवित है । पुरुष ने नारी को शब्दों में जितने सम्मान का नाटक रचा है, अपनी प्रवृति से उसे निरीह और भोग्य ही रखा है । कल की देवदासी और आज की मॉडल या सुन्दरियों का चुनाव क्या है ? इसी जीवन्त समस्या को लेखक ने काफी गहरे उतरकर अपने अनुपम शिल्प में बाँधा है । इसमें एक ही प्रधन-स्वर बार- बार ध्वनित होता है—आखिर यह कबतक, आखिर यह कब तक...?

Shivram Karant

भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता डॉ० शिवराम कारंत का जन्म 10 अक्तूबर, 1902 को कर्नाटक के दक्षिण कन्नड क्षेत्र के कोटग्राम जिले में हुआ । वे गांधीजी के आह्वान पर पढाई छोडकर स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े । जेल से छूटने के बाद गांधी जी के रचनात्मक कार्यों में जुट गये ।
डॉ० कारंत ने साहित्य की सभी विधाओं में लिखा है । उपन्यास, नाटक के साथ-साथ कहानी, निबन्ध, आलोचना के अतिरिक्त विज्ञान सम्बन्धी विषयों पर भी लिखा है । आपके प्रकाशित ग्रंथ साठ से अधिक हैं । कन्नड़ में 'विश्वकोश' के अतिरिक्त 'बालप्रपंच' भी इनकी देन है ।
1958 में डॉ० कारन्त को साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ । 1968 में भारत सरकार ने आपको पद्मभूषण सम्मान से विभूषित किया । 1978 में आप भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित हुए । 1960 में स्वीडन की अकादमी ने लोक-नृत्य कला के लिए उन्हें सम्मानित किया । अब तक हिन्दी में आपके चार उपन्यास—'पहाडी जीव', 'धरती की ओर', 'मृत्यु के बाद' और 'मुकज्जी' प्रकाशित हो चुके हैं । 'तन मन' हिन्दी में लेखक का पाँचवां उपन्यास है ।

स्मृति शेष : 9 दिसम्बर, 1997

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