Sant Ravidas Ki Ramkahani

Devendra Deepak

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  • Year: 2011

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Arya Prakashan Mandal

  • ISBN No: 9788189982133

'संत रविदास की रामकहानी' कवि देवेन्द्र दीपक की संत  रविदास के जीवन-दर्शन पर अपने किस्म की प्रथम औपन्यासिक रचना है । इसमें सृजन और अध्यात्प चेतना के आस्थाशील आयाम उदघाटित हुए हैं । लेखक ने रविदास के अंतत् से उतरने, उसके चिंतन के मर्म को उकेरने का सफल प्रयास किया है । इसमें संत के मन-आत्म की पारदर्शी निर्मलता तथा हाथ के श्रम के प्रति गहरी आस्था भी व्यक्त  हुई है । अपने समाज के श्रमशील उज्जवल समुदाय को दलित बना दिए जाने की पीडा के साथ भारतीय मूल्यों की पड़ताल करते हुए सामाजिक न्याय, समता, संवेदना की हितैषी स्थापनाएँ भी हुई है ।
संत रविदास की वाणी से पौराणिक आख्यानों, भक्ति-ज्ञान-कर्म के योग विषयक विचारों, लोक में व्याप्त पारंपरिक इनके रंरा-रूपों को यथावश्यक प्रयुक्त करके देवेन्द्र दीपक ने एक बड़े अभाव की पूर्ति कर बड़ा काम किया है । भारतभूमि पर बहने वाली पुण्य-सलिला नदियों-गंगा, यमुना, सरस्वती को मानव शरीर से कार्यशील-इड़ा, पिंगला, सुषुम्ना से जोड़कर योग-अध्यात्म को तथा राष्ट्रीयता के चिंतन-दर्शन को पुष्ट किया है ।
वसुधैव कुटुंबकम के वैश्विक विचार को रविदास की समूची वाणी में लक्षित-रेखांकित कर भारतीय अस्मिता एवं लोक-आस्था के प्रति छीजती निष्ठा को पुनः सृजनात्मक आधार प्रदान किया है तो जात-पांत, ऊँच-नीच के सामाजिक संताप को मन और मनोरथ की स्पंदनशीलता, सुचिता, मानवीयता के समक्ष व्यर्थ एवं अमानवीय सिद्ध किया है । भारतीय समाज में फैले धार्मिक पाखंड को निरस्त करती एवं रविदास के ब्रह्मांड व्यापी राम तथा गुरु रामानंद की देशना को रूपायित करती यह रचना अपने काव्यात्मक ललित गद्य के कारण आकर्ष और पठनीय है ।

Devendra Deepak

देवेन्द्र दीपक

जन्म : 31 जुलाई, 1934
शिक्षा : एम०एं० अंग्रेजी, एम०ए० हिंदी, पी-एच०डी०, साहित्यरत्न
कृतियों : 'सूरज बनती किरण', 'बंद कमरा : खुली कविताएँ' (आपातकालीन कविताएँ) ० 'मास्टर धरमदास', 'हम बौने नहीं' (अत्यंज कविताएँ) ० भूगोल राजा का : खगोल राजा का' (काव्य नाटक) ० 'दबाव' (कठपुतली नाटक) ० 'महान शिक्षाशास्त्रियां के सिद्धांत’ (अनुवाद) ० 'विचारणा वीथिका', 'कुंडली चक्र पर मेरी वार्ता' ।
कार्यक्षेत्र : शिक्षा, साहित्य, युवा कल्याणा ।
संपादन : अत्यल्प, सार्थक, छंदप्रणाम, पथिक, भारतवर्ष, वन्या ।
मध्य प्रदेश के अनेक महाविद्यालयों में अध्यापन, 1994 में प्राचार्य पद से सेवानिवृत ।
वंचित समाज के विकास में शब्द और कर्म दोनों स्तर पर सहयोग; विश्व हिंदी सम्मेलन के निमित्त मोरिशस, लंदन तथा सूरीनाम, न्यूयॉर्क की यात्रा ० पूर्व प्राचार्य, परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र (अनुसूचित जाति) भोपाल ० पूर्व निदेशक, मध्य प्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी ० पूर्व निदेशक, साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश संस्कृति परिषद, भोपाल ० प्रधान संपादक 'साक्षात्कार' ।
सम्मान : साहित्य शिरोमणि (देहरादून् 1970) ० साहित्य मनीषी (पटना, 1979) ० हिंदी सेवा साहित्यकार सम्मान (ग्वालियर, 1986) ० शिक्षक साहित्यकार सम्मान (परासिया, 1987) ० साहित्य वागीश (दिल्ली, 1990) ० नागरिक सम्मान (भोपाल, 1990) ० भारत भारती सम्मान (सूरजपुर, 1991) ० संत रविदास सम्मान (उज्जैन, 2002) तथा कई अन्य सम्मान ।

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