Naav Na Baandho Aisi Thaur

Dinesh Pathak

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  • Year: 2010

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Parmeshwari Prakashan

  • ISBN No: 9789380048130

नाव न बाँधो ऐसी ठौर
हिंदी के सुपरिचित कथाकार दिनेश पाठक के इस उपन्यास का केंद्रीय विषय है प्रेम।  यह विवाहेतर प्रेम है, जिसका अपना अलग रंग है और अलग संघर्ष भी। नारी-पुरुषजन्य आकर्षण प्रकृति का सहज स्वभाव है। यह स्वभाव इतना प्रबल है, इतना अदम्य कि बावजूद तमाम वर्जनाओं के इसकी धार सतत प्रवाहित रहती है। इस आकर्षण में न तो कोई उम्र होती है और न ही कोई शर्त। कब, कहाँ और कैसे दो विपरीत एक-दूसरे के प्रति आकृष्ट होकर साडी वर्जनाओं को चुनौती देने लगेंगे, कहना मुश्किल है। आज के दौर में जब स्त्री-पुरुष साथ-साथ काम कर रहे हैं, कंधे से कंधा मिलकर, तब इस आकर्षण की परिधि और व्यापक हो उठी है। साथ-साथ काम करते हुए कब दो प्राणी चुपके से एक-दूसरे की भावनाओं में भी शामिल हो जाते हैं, ज्ञात नहीं पद्त। और यदि वे दोनों ही पहले से विवाहित हों तो भावनाओ का यह ज्वार एक नयी समस्या को जन्म देता है - सामाजिक दृष्टि से कदाचित यह अवैध प्रेम है, एकदम वर्जित व निषिद्ध प्रेम, विवाह-व्यवस्था के नितांत विपरीता उपन्यास में एक साथ दो धुरियां हैं-एक में समाज के विखंडन का भय है, परंपरागत मान्यताओं-मूल्यों के साथ परिवारों के टूटने व समाज के अराजक होने का डर है तो दूसरे में व्यक्ति स्वातंत्र्य के आगे सामाजिक मूल्यों के प्रति अस्वीकार का भाव। प्रश्न है विवाहित स्त्री-पुरुष के बीच क्या यह विवाहेतर प्रेम-सम्बन्ध सही है ? निष्कर्ष पर तो पाठकों को पहुंचना है।

Dinesh Pathak

दिनेश पाठक
जन्म: मई, 1950, कुमाऊं, उत्तराखंड में
आठवें दशक की पीढ़ी के कथाकार। सभी शीर्षस्थ पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित। कुछ कहानियों का अन्य भाषाओं में अनुवाद। अब तक नौ कहानी संग्रह, दो उपन्यास व एक संपादित पुस्तक प्रकाशित
कहानी संग्रह: ‘शायद यह अंतहीन’, ‘धुंध भरा आकाश’, ‘जो गलत है’, ‘इन दिनों वे उदास हैं’, ‘रात के बाद’, ‘अपने ही लोग’, ‘पारुलदी’, ‘नस्ल’, ‘देखना एक दिन’
उपन्यास: ‘यानी अंधेरा’, ‘नाव न बांधे ऐसी ठौर’, ‘हवा है’ (शीघ्र प्रकाश्य)
संपादित पुस्तक: ‘आंचलिक कहानियां’

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