Maafiya

Girish Pankaj

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  • Year: 2010

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Jagat Ram & Sons

  • ISBN No: 9788188125302

माफिया
जानते सब हैं, पर लिखते बहुत कम है कि राजनीति के समान साहित्य में भी दल ही दल हैं, तिकड़पबाजियाँ और सौदेबाजियाँ हैं, अवसरवाद और खिलाऊ-पिलाऊवद है, अफसरों और नेताओं के 'साहित्यिक' हथकंडे हैं और संपादकों तथा सम्मानों के बिकाऊ झंडे हैं । गिरीश पंकज ने इस उपन्यास में संगोष्टियों आदि के माध्यम से बिना 'लोक-लाज' के भय के इन सबके कपडे उतार दिए हैं । अब यह पाठकों पर निर्भर करता है कि वे इस 'नंगेपन' पर 'कैसी नजर डालते हैं! उपन्यास का प्रमुख कथ्य बहुरूपी साहित्य-माफिया है, जिसके बीच-बीच से शोध-माफिया, विज्ञापन-पुराण, छंद-हत्या, ठेका-लेखन आदि पर भी लटके-झटके सफाई किए गए है । दूसरी ओर, एक आदर्शवादी साहित्यकार की मनोव्यथा, आकांक्षाएं-अपेक्षाएं और सपने भी फूट-फूटकर निकले हैं।
उपन्यास इस दृष्टि से अंकों का काफी ऊँचा प्रतिशत अर्जित करता है कि इसके दर्जनों अच्छे-बुरे पात्र ऐसे हैं, जिनसे हम रोज़ मिलते हैं, और इसका घटनाक्रम ऐसा है, जैसा हमारे सामने दिन-रात घटित होता रहता है। कथानक का यह सामाजिक सरोकार साहित्य पर हावी होते माफिया राज से जुड़कर आज शायद हर सही-गलत साहित्यकार के रास्ते को किसी न किसी तरह प्रभावित कर रहा है ।
गिरीश पंकज साहित्य की धारा में काफी तैर चुके हैं, इसलिए इनकी भाषाभिव्यक्ति के प्रवाह में एक कुशल तैराक की गति है । तय समझिए कि यह उपन्यास साहित्यिक गतिविधियों से जुड़े हर स्तर के पाठकों को पसंद आएगा, क्योकि वे इसके किसी न किसी पात्र से अपना तादात्म्य स्थापित किए बिना नहीं रह सकेंगे

Girish Pankaj

गिरीश पंकज 
जन्म : 1 जनवरी 1957
शिक्षा : एम०ए० (हिंदी), बी० जे० (प्रावीण्य सूची में प्रथम), डिप्लोमा इन फोक आर्ट ।
प्रकाशन : छड व्यंग्य-संग्रड : ‘ट्यूशन शरणम् गच्छामि', 'भ्रष्टाचार विकास प्राधिकरण', 'ईमानदारों की तलाश', 'मंत्री को जुकाम', 'मेरी इक्यावन व्यंग्य रचनाएँ', 'नेताजी बाथरूम में' । दो व्यंग्य उपन्यास : 'मिठलबरा की  आत्मकथा' एवं 'माफिया' (दोनों पुरस्कृत), नवसाक्षरों के  लिए बारह पुस्तकें, बच्चों के लिए चार पुस्तकें । एक गजल-संग्रह, एक हास्य चालीसा। चार व्यंग्य-संग्रहों में  रचनाएं संकलित । अनुवाद : कुछ रचनाओं का तमिल, उर्दू  कन्नड़, अँगरेजी, नेपाली, सिंधी, मराठी, पंजाबी, छत्तीसगढ़ी आदि में अनुवाद ।
सम्मान-पुरस्कार : व्यंग्य का बहुचर्चित अट्टहास युवा सम्मान । 'माफिया' के लिए लीलारानी स्मृति सम्मान एवं 'मिठलबरा की आत्मकथा' के लिए रत्नभरती सम्मान । तीस से ज्यादा संस्थाओं द्वारा सम्मान-पुरस्कार ।
विदेश प्रवास : अमेरिका, ब्रिटेन, त्रिनिडाड एंड टुबैगो, थाईलैंड, मॉरीशस, श्रीलंका, नेपाल, बहरीन, मस्कट । कार्यानुभव : तीस साल से विभिन्न समाचार-पत्रों के   संपादकीय विमाग में कार्य । अनेक पुरस्कार से सम्मानित । अनुवाद पत्रिका 'सद्भावना दर्पण' का प्रकाशन-संपादन ।
अन्य : प्रदेश सचिव-सर्वोदय मंइल, अध्यक्ष-छत्तीसगढ़ राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, सदस्य-छत्तीसगढ़ बाल कल्याण परिषद समेत अनेक संस्थाओं से संबद्ध । व्यंग्य रचनाओं पर चार छात्रों द्वारा लघु शोधकार्य । पत्रिका साहित्य वैभव, रायपुर द्वारा 'पचास के गिरीश' नामक वृहद विशेषांक प्रकाशित । पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर व्यंग्य एवं सामयिक मुद्दो पर लेखन ।

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