Kanak Chadi

Santosh Shelja

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  • Year: 2003

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Bhartiya Prakashan Sansthan

  • ISBN No: 9788188122066

कनक छड़ी
'धन्नो के कान उसकी तरफ़ लगे थे,
किन्तु मन ? 
मन तो आज जैसे हजार  आँखों से 
उन तसवीरों को देख रहा था,
जो उसके स्मृति-पट पर
उभर रही थीं ।
उनमें तारा ही तारा थी…
कभी बेरियों से बेर तोड़ते हुए
कभी शटापू खेलते हुए
कभी को खेतों में कोयल संग
कूककर भागते हुए 
कभी ढोलक की थाप पर गाते हुए
कभी 'तीयों' के गोल में
थिरकती तारा नजर आती
कभी ब्याह के सुर्ख जोड़े में सजी हुई
लजाती-मुस्कराती दिखती
उसकी आँसुओं में डूबी छवि के साथ
यह सिनेमा रील टूट जाती । 
[इसी उपन्यास से]

Santosh Shelja

संतोष शैलजा
अमृतसर (पंजाब) के एक गाँव में जन्म  संतोष शैलजा ने दसवीं तक शिक्षा वहीं प्राप्त की । भारतविभाजन की त्रासदी के पश्चात माता-पिता सहित दिल्ली आ गई । यहीं पर उच्च शिक्षा- एम०ए०, बी०एड० तक-ग्रहण की और कुछ वर्ष अध्यापन-कार्य किया । फिर श्री शान्ता कुमार है विवाहोपरांत पालमपुर, हिमाचल प्रदेश में रहने लगी । पति-पत्नी दोनों को लेखन में रुचि होने से दोनों की दस-दस पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है ।
संतोष शैलजा की कुछ उल्लेखनीय पुस्तकें है :
उपन्यास : 'कनक छड़ी',  'अंगारों में फूल', 'निन्नी'
कहली-संग्रह : 'जौहर के अक्षर', ज्योतिर्मयी', 'पहाड़ बेगाने नहीं होंगे'
कविता-संग्रह : 'ओ प्रवासी मीत मेरे'
अन्य पुस्तकें : 'धोलाधार', 'हिमाचल की लोककथाएँ'

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