Kaali Dhar

Mahesh Katare

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  • Year: 2019

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Amarsatya Prakashan

  • ISBN No: 9788193759875

जमादारिन की हवेली बीसियों साल से बंद थी। साल में एकाध बार उनका बेटा आगरा से आता। विशेषतः दीपावली से पहले आकर वह दो-चार दिन ठहरता। कलई-चूने से मंदिर की पुताई-सफाई करवाता और लौट जाता। अटारी आकर वह सेठ की हवेली में ही ठहरता। सेठ के लड़केपोते उससे छुआछूत वाला व्यवहार नहीं करते थे। अगली पीढ़ी को हवेली की आवश्यकता न थी। इस बीहड़ में कौन बसतातालों की चाबियाँ सेठ परिवार के पास थीं। हवेली में एक छोटा सा द्वार पीछे बीहड़ों की ओर भी खुलता थाजिसमें से होकर बागियों के गिरोह हफ्रतों हवेली में पड़े रहते और चौमासे अर्थात् बरसात में तो महीनों। सबको पता था। पुलिस की गश्त भी यदा-कदा सामने के द्वार पर जड़े ताले को देखती हुई निकल जाती थी। गिनती का पुलिस-दल डाकुओं से टकराने का खतरा कैसे उठाएबागी भी सामान्यजन को परेशान नहीं करते थे। उनके निशाने पर तो दुश्मनधनवान अथवा मुखबिर आता था। रसद लाने वाले को पूरा पैसा चुकाते थे बागी।

लाला जी ने सेठ श्रीलाल के वंशजों से संपर्क किया। जमादारिन के पुत्र से अनुमति ली तो ठाकुर ने दाऊ मानसिंह को समस्या का पहलू समझाया। मानसिंह का गिरोह ही उस समय सबसे प्रभावशाली था। वह कड़ाई से बागी-धर्म के नैतिक नियमों का पालन करते थे। कुल मिलाकर आठ दिन में ऊपरी औपचारिकता पूरी हो गई एवं आठ दिन सफाई आदि के जरिये हवेली को बसने योग्य बनाने में लगे। इस तरह अम्मा ठाकुर जमादारिन की हवेली में रहवासी हो गईं। नवाब ठाकुर की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लाला भभूती लाल ने कुछ विशेष व्यवस्था भी कर दी। 

-इसी उपन्यास से। 

Mahesh Katare

महेश कटारे

जन्म: जनवरी, 1948, ग्वालियर (म.प्र.)

शिक्षा: हिंदी, संस्कृत, राजनीतिशास्त्र में (एम..)

प्रकाशित कृतियाँ: समर शेष है, इतिकथा अथकथा, मुर्दा स्थगित, पहरुआ, छछिया भर छाछ, सात पान की हमेल, फागुन की मौत, मेरी प्रिय कथाएँ, गौरतलब कहानियाँ (कहानी संग्रह) महासमर का साक्ष, अँधेरे युगांत के, पचरंगी, विभाजन (नाटक) पहियों पर रात-दिन, देस बिदेस दरवेश (यात्रवृत्त)  कामिनी काय कांतारे (दो खंड) (उपन्यास)

नजर इधर-उधर, समय के साथ-साथ, प्रायः सभी हिंदी पत्र-पत्रिकाओं में कहानियाँ, नाट्य, समीक्षाएँ, आलेख, उपन्यास अंश प्रकाशित। नृत्य नाटिकाओं, नाटकों का प्रसारण, मंचन, दूरदर्शन पर फिल्म-कहानी पहियों पर चढ़े सुख

पुरस्कार/सम्मान: सारिकासर्वभाषा कहानी प्रतियोगिता-1983 में प्रथम पुरस्कार वागीश्वरी सम्मान म.प्र. साहित्य परिषद का मुक्तिबोधपुरस्कार साहित्य अकादमी म.प्र. का सुभद्राकुमारी चौहानराष्ट्रीय पुरस्कार राजभाषा परिषद बिहार का सम्मान  शमशेर सम्मान-2005, कथाक्रम सम्मान-2009 , ढींगरा फाउंडेशन (अमेरिका) कथा सम्मान-2014 (स्कारबरो, कनाडा) कुसुमांजलि सम्मान-2015 आदि

संप्रति: खेती और लेखन

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