Jaane-Anjaane Dukh

Ashwani Kumar Dubey

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  • Year: 2014

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Amarsatya Prakashan

  • ISBN No: 9789383234202

अश्विनीकुमार दुबे का उपन्यास ‘जाने-अनजाने दुःख’ एक मध्यवर्गीय परिवार के मुख्य चरित्र जगदीश प्रसाद तथा उनके परिवार की अंतर्कथा  है। एक निम्न मध्यवर्गीय डाक कर्मचारी एवं कृषक के पुत्र जगदीश प्रसाद के जन्म, शिक्षा, शादी-ब्याह, काॅलेज शिक्षक से वाइस चांसलर बनने, इस बीच पुत्र-पुत्रियों के जन्म, उनके शादी-ब्याह और विकास के दौरान 70 वर्ष की अवस्था में उनके सेवानिवृत्त होकर अपने पुश्तैनी गांव पहुंचने की कथा को पूरी विश्वसनीयता एवं सशक्तता के साथ अश्विनीकुमार दुबे ने प्रस्तुत किया है।
इस उपन्यास के माध्यम से अश्विनीकुमार दुबे ने जगदीश प्रसाद और उनकी पत्नी सुमन के चरित्र को आमने-सामने रखते हुए सुख-दुःख के प्रति उनकी अनुभूतियों की कलात्मक अभिव्यंजना की है।
इस उपन्यास में अश्विनीकुमार दुबे की भाषा की पठनीयता और किस्सागोई ने इसे महत्त्वपूर्ण बनाया है। विश्वास है, हिंदी जगत् में इसका स्वागत होगा।

Ashwani Kumar Dubey

डॉ० अश्चिनीकुमार दुबे
जन्म : जुलाई, 1956, पन्ना  (म०प्र०)
शिक्षा : सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा
एम०ए०, पी-एच०डी० (हिंदी साहित्य)
1970 से विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में अनवरत लेखन
कहानियाँ, व्यंग्य, निबंध, नाटक, पटकथा, रेडियो रूपक, डायरी, रिपोर्ताज, संस्मरण आदि प्रकाशित
शोध : नवे दशक के हिंदी व्यंग्य साहित्य का मूल्यांकन
कृतियाँ : 'घूँघट के पट खोल' (1991), 'शहर बंद हैं' (1996), 'अटैची संस्कृति' (1996), 'अपने-जपने लोकतंत्र’ (1999)
भारतेंदु पुरस्कार (1995)

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