G-male Express

Alka Sinha

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  • Year: 2017

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-93-85054-95-2

बदलते समय के साथ वैचारिक मुठभेड़ करता यह उपन्यास पाठक को एक ऐसी दुनिया से रूबरू कराता है जो उसे चैंकाती है कि ये पात्र, ये परिवेश उसके लिए अपरिचित तो नहीं थे मगर वे उसे उस तरह से पहचान क्यों नहीं पाए? देवेन त्रिपाठी को मिली डायरी की तरह ही हमारी जिंदगी की किताब भी अनेक प्रकार के कोड्स से भरी है जिसे सभी अपनी-अपनी तरह से डिकोड करते हैं। इसीलिए उसे जानने और समझने का सिलसिला कभी खत्म नहीं होता। 
स्कूल-काॅलेज की जिंदगी के बीच पनपते अबोध प्रेम की मासूमियत को चित्रित करता यह उपन्यास जब उसमें हो रही सौदेबाजी को उजागर करता है तब सारा तिलिस्म टूट जाता है और सवाल उठता है कि अगर दैहिक सुख के बिना प्रेम अधूरा है तो क्या यौन-सुख हासिल करना ही प्रेम की परिणति है? क्या स्त्री के लिए इस सुख की कामना करना अनैतिक है? सवाल यह भी है कि महज गर्भ धारण न करने से ही स्त्री की यौन-शुचिता प्रमाणित हो जाती है तो पुरुष की शुचिता कैसे प्रमाणित की जाए? पैसों की खातिर यौन-सुख देने वाली स्त्रियाँ अगर वेश्याएं हैं तो स्त्रियों को काम-संतुष्टि बेचने वाले पुरुषों को कौन सी संज्ञा दी जाए? इन सभी पहलुओं पर शोधपरक चिंतन करता यह उपन्यास स्त्रियों की काम-भावना की स्वीकृति का प्रश्न उठाने के साथ-साथ स्त्री-पुरुष की यौन-शुचिता को बराबरी पर विश्लेषित करने की भी मांग करता है क्योंकि बेलगाम संबंधों से पैदा हुई जटिलताओं को समझे बिना ‘आधुनिक’ होने का जोखिम नहीं उठाया जा सकता है।
यह कृति निम्नतम से उच्चतम की एक ऐसी चेतना-यात्रा है जो बुद्धत्व अथवा महामानव में रूपांतरण का दावा करने के बदले पाठक को सही मायने में जाग्रत करती है।

Alka Sinha

अलका सिन्हा
जन्म : 9 नवंबर, 1964, भागलपुर, बिहार ।
शिक्षा : एम०बी०ए०, एम०ए०, पी०जी०डी०टी०, केंद्रीय  अनुवाद ब्यूरो, गृह मंत्रालय द्वारा संचालित अनुवाद प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में रजत पदक ।
रचना-कर्म : 'काल की कोख से', 'मैं ही तो हूं ये', 'तेरी रोशनाई होना चाहती हूँ' (कविता-संग्रह) ० 'सुरक्षित पंखों की उड़ान', 'मुझसे कैसा नेह' (कहानी-संग्रह) ।
दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, मानित विश्वविद्यालय, धारवाड़, कर्नाटक से 'सुरक्षित पंखों की उड़ान में स्त्री-विमर्श' पर शोध ०  प्रतिष्ठित पब्लिक स्कूलों के हिंदी विषय के पाठ्यक्रम से कहानी शामिल ०  आकाशवाणी की विदेश प्रसारण सेवा द्वारा दर्जनों कहानियां नेपाली में अनूदित और प्रसारित ।
विशिष्ट गतिविधियाँ : केंद्रीय हिंदी निदेशालय, मानव संसाधन विकास मंत्रात्तय की हिंदीतर भाषी हिंदी लेखक पुरस्कार योजना में विशेषज्ञ के रूप से शामिल ०  अंतरराष्ट्रीय लेखन से जुडी हिंदी की साहित्यिक पत्रिका 'अक्षरम् संगोष्ठी' की सह-संपादक (मानद और अवैतनिक) ० दिल्ली दूरदर्शन के साहित्यिक कार्यक्रम 'पत्रिका' को विशिष्ट श्रृंखलाओं की प्रस्तोता ०  गत तेरह वर्षों से गणतंत्र दिवस परेड का आंखों देखा हाल सुनाने का गौरव और राष्ट्रीय महत्त्व के अन्य कार्यक्रमों की रेडियों कमेंटेटर ० केंद्रीय सचिवालय हिंदी परिषद की पूर्व साहित्य एवं संस्कृति मंत्री ।
सम्मान : कविता-संग्रह 'मैं ही तो हूं ये' पर हिंदी अकादमी, दिल्ली सरकार द्वारा साहित्यिक कृति सम्मान (2002) ० संसदीय हिंदी परिषद द्वारा संसद के केंद्रीय कक्ष में राष्ट्रभाषा गौरव सम्मान (2009) ०  कविता-संग्रह 'तेरी रोशनाई होना चाहती हूँ' पर परंपरा ऋतुराज सम्मान (2011) ० महात्मा फुले रिसर्च अकादमी, नागपुर द्वारा अमृता प्रीतम राष्ट्रीय पुरस्कार (2011) ०  विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ, भागलपुर की सर्वीच्च मानद उपाधि 'विद्यासागर' (2011)

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