Avinashi

Dr. Vishv Narayan Shastri

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  • Year: 2002

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170165187

अविनाशी
संस्कृत वाड्मय में यद्यपि कथा-साहित्य का प्रचार है, किंतु आधुनिक रीती से लिखित उपन्यास की न्यूनता परिलक्षित होनी है । 'अविनाशी' संस्कृत-साहित्य का सर्वप्रथम ऐतिहासिक उपन्यास है, ऐसा कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी । सप्तम शताब्दी के प्राग्ज्योनिष- पुर अर्थात असम राज्य के राजा कुमार भास्कर वर्मा के साथ कनौजाधिपति हर्षवर्धन की मित्रता तथा दोनों का परस्पर मिलकर गौड़ राज्य पर आक्रमण करना मुख्यतया इस उपन्यास का वर्ण्य विश्व है । उक्त ऐतिहासिक आधार पर औपन्यासिक कल्पना करने एवं चरित्र-चित्रण  युक्त सामाजिक, सांस्कृतिक विषयों पर प्रकाश डालने से उपन्यास का कलेवर परिपुष्ट हुआ है । मूल उपन्यास सन 1984 में संस्कृत भाषा में प्रकाशित हुआ था, तत्पश्चात् साहित्य अकादेमी आदि विभिन्न संस्थान- प्रतिष्ठानों ने पुरस्कृत भी किया था । इतिहास एवं कल्पना-संभूत होने पर भी इसका चारित्रिक चित्रण हृदयावर्जक एवं सामाजिकता से ओतप्रोत है । मानवोचित पारस्परिक प्रेम, ईष्यों, द्वेषादि गुणों, अवगुणों का भी सम्यक प्रकाशन हुआ है ।
इस उपन्यास को सर्वसुलभ और बोधगम्य बनाने के लिए असमिया, बाँग्ला प्रभृति प्रादेशिक भाषाओं में भी इसका अनुवाद हुआ है और प्रकाशित भी किया जा रहा है । यह हिंदी संस्करण हिंदी-प्रेमी पाठकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रकाशित किया जा रहा है ।

Dr. Vishv Narayan Shastri

डॉ० विश्वनारायण शास्त्री 
सन् 1923 में जन्मे महामहोपाध्याय डॉ० विश्यनारायण शास्त्री संस्कृत के, विशेषत: दर्शन एवं तंत्रशास्त्र के सुप्रसिद्ध विद्वान, लेखक तथा समालोचक है । आपने प्राचीन पद्धति से संस्कृत भाषा, साहित्य, मीमांसा और न्याय-दर्शन का अध्ययन किया है और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से सर्वोच्च श्रेणी में स्नात्तकोत्तर परीक्षा उतीर्ण का 'Concept And Development Of Samavaya In Nyaya-Vaisesika Philosophy' विषय पर प्रस्तुत अपने शोधग्रंथ के लिए डी० लिट०, की उपाधि प्राप्त की है ।
संस्कृत, हिंदी, असमिया तथा अंग्रेजी भाषाओं में दक्ष डॉ० शास्त्री के अनेक शोधपत्र प्रकाशित हैं ।  आपने 'कालिकापुराण' का अंग्रेजी अनुवाद और 'कथासरित्सागर',  'साहित्यदर्पण' आदि का असमिया अनुवाद व संपादन भी किया है । अनुसंधानात्मक साहित्य के अलावा सृजनात्मक साहित्य की रचना आपकी विशेष उपलब्धि रही है । यह ऐतिहासिक उपन्यास 'अविनाशी' आपकी सर्वोत्कृष्ट कृति है । इस अमर कृति के लिए आपको साहित्य अकादेमी पुरस्कार, उत्तर प्रदेश संस्कृत अकादमी द्वारा प्रदत्त बाणभट्ट पुरस्कार, भारतीय भाषा परिषद पुरस्कार तथा उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान पुरस्कार से सम्मानित किया गया है । संस्कृत में विशिष्ट पांडित्य तथा शास्त्र पें विशारदना के लिए सन् 1986 में आप राष्ट्रपति सम्मान से भी सम्मानिन हो चुके है ।

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