Aranyakaand

Pranav Kumar Bandhopadhyaya

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  • Year: 2004

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Arya Prakashan Mandal

  • ISBN No: 9788188118700

अरण्यकाण्ड
रामकथा के एक अंश पर आधारित आख्यान है अरण्यकाण्ड । आज के संदर्भ में । आज के समय की पूष्ट्रभूमि में जीवन की घटनाओं को जिस आदिकथा के आधार पर प्रस्तुत किया गया है, वह मनुष्य को
निरंतर कुरेदती रहती । है यह यात्रा का एक पड़ाव मात्र । छोटा-सा । इस पड़ाव  में कई बार विराम तो आता है किंतु अंतत: यह अंत नहीं है ।
प्रणव कुमार वंद्योपाध्याय की यह कथाकृति बारंबार पाठक को उद्वेलित करती है । यह कृति प्रस्तुत करती है मनुष्य की तात्कालिक पराजय और मनुष्य की ही जिजीविषा । लेखक की यह कथाकृति समय का एक असमाप्य संबोधन है ।

Pranav Kumar Bandhopadhyaya

रणव कुमार वंद्योपाध्याय की अन्य रचनाएँ-

कविता : नरक की क्रांति में मैं ० मृत शिशुओं के लिए प्रार्थना ० काली कविताएं ० मुर्दागाड़ी ० नक्सलबाड़ी ० कालपुरुष ० लालटेन और कवि जमाल हुसेन ० मेघना ० सपने में देश
उपन्यास : खबर (तीन खंडों में) ० गोपीगंज संवाद ० आदिकाण्ड ० अमृतपुत्र ० पदातिक ० पंचवटी
कथा-संग्रह : अथवा ० ईश्वर बाबू अनुपस्थित थे ० बर्फ के रंग का शरीर ० बारूद की सृष्टिकथा ० आत्मज ० स्थानीय समाचार ० प्रणव कुमार वंद्योपाध्याय की विशिष्ट कहानियों
नाटक : फैसले का दिन
आत्मकथा : विदा बंधु विदा
डायरी : दिसंबर 1979
यात्रा-वृतांत : बहुत दूर बहुत पास ० शायद वसंत
रिपोर्ताज : क्रिस्टोबल मिरांडा
निबंध : इत्यादि 
संपादन : दलित प्रसंग ० भाषा, बहुभाषिता और हिंदी
इनके अतिरिक्त पश्यंती का संपादन टेलीविज़न के लिए फिल्मों का निर्देशन ० कैनवास पर चित्रांकन भी ।

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