Akshardveep

Pranav Kumar Bandhopadhyaya

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  • Year: 2011

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Parmeshwari Prakashan

  • ISBN No: 9789380048123

अक्षरद्वीप
अक्षरद्वीप’ आज के मूल्यों के अंतर्गत रामकथा के ‘सुंदरकांड’ का एक पुनर्पाठ है। इस उपन्यास में वैदेही, रावण और महावीर की भूमिकाएँ जिन सीमाओं तक संघातपूर्ण हैं, वे आज के अतिरिक्त अतीत की भी पहचान हैं। यह मनुष्य का निरंतर जारी एक असमाप्य प्रयास है। अगर आज हम ‘अक्षरद्वीप’ की कथाभूमि को कुछ सीमा तक व्याख्यायित कर पाए, कथाकार शायद किसी न किसी तरह पंक्ति-दो पंक्ति तक कुछ आगे निकल गया।
प्रणव कुमार वंद्योपाध्याय आज के तमाम हिंदी कथाकारों में कहाँ खड़े हैं, कहना कठिन होगा। फिर भी, हम कह सकते हैं कि आज के परिप्रेक्ष्य में लेखक को मनुष्य और समय की पहचान किसी सीमा तक आकर खड़ी हो गई। कल की प्रतीक्षा में। संभवतः किसी न किसी प्रकार की लाग-लपेट के बिना कथाकार अपनी खोज से उस बिंदु तक पहुँच गया, जो है संसार का आदि आख्यान। असमाप्य भी।
अक्षरद्वीप’ किसी हद तक मनुष्य की एक यात्रा भी है। यात्रा के अतिरिक्त पृथ्वी का एक अनकहा इतिहास भी, जो प्रतिक्षण अपना सब कुछ बदल रहा है।

Pranav Kumar Bandhopadhyaya

रणव कुमार वंद्योपाध्याय की अन्य रचनाएँ-

कविता : नरक की क्रांति में मैं ० मृत शिशुओं के लिए प्रार्थना ० काली कविताएं ० मुर्दागाड़ी ० नक्सलबाड़ी ० कालपुरुष ० लालटेन और कवि जमाल हुसेन ० मेघना ० सपने में देश
उपन्यास : खबर (तीन खंडों में) ० गोपीगंज संवाद ० आदिकाण्ड ० अमृतपुत्र ० पदातिक ० पंचवटी
कथा-संग्रह : अथवा ० ईश्वर बाबू अनुपस्थित थे ० बर्फ के रंग का शरीर ० बारूद की सृष्टिकथा ० आत्मज ० स्थानीय समाचार ० प्रणव कुमार वंद्योपाध्याय की विशिष्ट कहानियों
नाटक : फैसले का दिन
आत्मकथा : विदा बंधु विदा
डायरी : दिसंबर 1979
यात्रा-वृतांत : बहुत दूर बहुत पास ० शायद वसंत
रिपोर्ताज : क्रिस्टोबल मिरांडा
निबंध : इत्यादि 
संपादन : दलित प्रसंग ० भाषा, बहुभाषिता और हिंदी
इनके अतिरिक्त पश्यंती का संपादन टेलीविज़न के लिए फिल्मों का निर्देशन ० कैनवास पर चित्रांकन भी ।

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