Udaanein Oonchi Oonchi

Krishna Agnihotri

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  • Year: 2016

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-93-83233-71-7

कृष्णा अग्निहोत्री वरिष्ठ रचनाकार हैं उन्होंने कहानी, उपन्यास तथा आत्मकथा आदि विधाओं में अपने लेखन से पाठकों को प्रभावित किया हैं उनकी सर्वोपरि विशेषता है-स्पष्टता, पठनीयता और बेबाकी। यह कहानी संग्रह पढ़ते हुए पाठक अनुभव करेंगे कि जीवन के साथ रचना का भी एक लंबा अनुभव यहां आकार ले रहा है।
इन कहानियों में जीवन के विविध आयाम व परिवेश हैं। आदिवासी भी कठिनाइयों से जूझ रहे हैं। उल्लेखनीय यह है कि प्रत्येक कहानी अपनी विशेष मौलिकता से पूर्ण है। भाषा सरल पर ग्राह्य एवं अर्थपूर्ण है। समस्त लेखन मनोरंजन के साथ सोद्देश्यपूर्ण सार्थकता से भरपूर व संवेदनाओं की कसौटी पर खरा है।

Krishna Agnihotri

कृष्णा अग्निहोत्री
कृष्णा अग्निहोत्री जो सदा वाद-विवादों को तहस-नहस कर जीवटता एवं संघर्ष की रचनाओं में अपने तीखे तेवर प्रस्तुत करती आ रही हैं। शासकीय कन्या महाविद्यालय खंडवा से रिटायर्ड ।
जन्म : नसीराबाद राजस्थान में ।
अब तक कई सम्मान व दो-चार पुरस्कार प्राप्त ।
अब तक छपी पुस्तकें :-
कहानी संग्रह : टीन के घेरे, गीताबाई, याहि बनारगी रंग बा, नपुंसक, दूसरी औरत, विरासत, सर्पदंश, जिंदा आदमी, जै सियाराम, अपने-अपने कुरुक्षेत्र, यह क्या जगह है दोस्तों, पंछी पिंजरे के और मेरी प्रतिनिधि कहानियां ।
उपन्यास : बात एक औरत की, टपरेवाले, कुभारिकाएँ, बौनी परछाइयाँ, अभिषेक, टेसू की टहनियाँ, निष्कृति, नीलोफर, मैं अपराधी हूँ बित्ता भर की छोकरी, नानी अम्मा मान जाओ ।
बच्चों  पाँच कहानी-संग्रह, एक रिपोर्ताज, एक समीक्षा, एक आत्मकथा ।

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