Tremontana

Urmila Jain

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  • Year: 2018

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Parmeshwari Prakashan

  • ISBN No: 978-81-934330-0-3

गैबरील गार्सिया मार्कवेज की कहानियों के अनुवाद का संग्रह ट्रेमोण्टाना उत्सवी तथा जीवन की विलक्षणताओं से भरपूर है। ये कहानियां मार्कवेज की उदारता तथा पात्रों को महसूस करने से अपनी ताकत बटोरती हैं जो अच्छी भी हैं, खराब भी और अशिष्ट भी पर निर्दोष हैं। तभी तो मार्कवेज की गणना शताब्दी के स्मरणीय लेखकों में की जाती है और उन्हें किसी भी भाषा का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण लेखक माना जाता है। उन्हें 1982 में नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया था। पाठक निश्चित ही इन कहानियों को पढ़कर प्रमुदित होंगे।

Urmila Jain

डॉ० उर्मिला जैन
शिक्षा : एम०ए०, डी०फिल० (इलाहाबाद विश्वविद्यालय), प्रथम श्रेणी एवं स्वर्ण पदक प्राप्त ।
प्रकाशन : आधुनिक हिंदी काव्य में क्रांति की विचार-धाराएं', 'साहित्य के नये सदेर्भ : अछूते विषयों पर कुछ विचार' (महेन्द्र राजा जैन के साथ), 'देश-देश में, गांव-गांव  में (यात्रा-वृत्तांत)। हिंदी की प्राय: सभी प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित ।
अन्य : 'नई आजादी', 'जैन बालादर्श' का संपादन । 1965 से 1980 तक विदेश-प्रवास एवं बाद में लगातार विदेश-यात्राएं । लंदन स्थित राष्ट्रीय पुस्तकालय में कार्य । 'ब्रिटिश म्यूजियम तथा 'इंडिया ऑफिस लायब्रेरी' में अनुसंधान ।
बी०बी०सी० से प्रसारण ।
ब्रिटेन तथा आयरलैंड की एकाधिक समाजसेवी अंतर्राष्ट्रीय  संस्थाओं में सक्रिय भागीदारी । 'भारत ज्ञान-विज्ञान समिति' में उत्तर प्रदेश इकाई की अध्यक्षा, 'सर्वेण्ट ऑफ इंडिया सोसायटी' की पूर्व अध्यक्षा ।
इलाहाबाद में निराश्रित महिलाओं के लिए 'शार्ट स्टे होम' और पीडित महिलाओं की सहायता के लिए 'लीगल सेल' की स्थापना तथा अपेक्षित सहायता । महिला संख्या 'मानुषी मंगल' की संस्थापक सदस्या । विगत अनेक वर्षों से महिला उत्थान संबंधो अन्य विविध कार्य ।
गुड़िया संग्रह तथा छायांकन अन्य अभिरुचियाँ ।
संप्रति : संस्कृतिकर्म तथा स्वतंत्र लेखन ।

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