Surakshit Pankhon Ki Uraan

Alka Sinha

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  • Year: 2004

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Jagat Ram & Sons

  • ISBN No: 978-81-88125-10-4

बारूदी गंध और धुएं से स्याह आज के आकाश पर हवाई आतंक के मनहूस बादल निरंतर मंडरा रहे हैं। हर पिछली भयावह घटना को छोअी बनाती अगली घटना अपने को बड़ा सिद्ध कर रही है। 13 दिसंबर, 2001 को भारतीय ससंद पर हुए आतंकवादी हमले से देश की संप्रभुता को तो आघात पहुंचा ही है, सुरक्षा का मनोविज्ञान भी घायल हुआ है। आतंवाद की भयावहता शांति और सुरक्षा के प्रति राष्ट्र को आशंकित कर रही है, तो 11 सितंबर, 2001 को न्यूयार्क के वल्र्ड ट्रेड सेंटर पर हुआ हवाई हमला आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप दे रहा है और हवाई आतंक के प्रति समूची धरती और आकाश के माथे पर चिंता और विषाद की लकीरें गहरा गई हैं। आज का समय बच्चे-बच्चे से सुरक्षा के प्रति जागरूक होने की मांग करता है दरवाजे खुले छोड़कर सोने का समय बहुत पीछे छूट गया। अब तो बंद दरवाजों में भी व्यक्ति खुद को असुरक्षित महसूस करता है। सुबह घर से निकला आदमी शाम को सकुशल लौट भी आएगा, कह पाना कठिन है। फिर भी जिंदगी चलती रहती है और चलते रहते हैं जिंदगी के कामकाज। सर्दी-खांदी की तरह भय और आतंक भी जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं। ऐसी सूरत में कहानी का उद्देश्य किस्सागोई अथवा मनोरंजन कतई नहीं है। वे जमाने लद गए जब दादी-नानी के पेट से सटकर राजा-रानी की कहानियां सुनते-सुनते नींद आ जाती थी और सपनों में उड़ने वाला घोड़ा लेकर उतर आता था कोई राजकुमार।
—अलका सिन्हा 

Alka Sinha

अलका सिन्हा
जन्म : 9 नवंबर, 1964, भागलपुर, बिहार ।
शिक्षा : एम०बी०ए०, एम०ए०, पी०जी०डी०टी०, केंद्रीय  अनुवाद ब्यूरो, गृह मंत्रालय द्वारा संचालित अनुवाद प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में रजत पदक ।
रचना-कर्म : 'काल की कोख से', 'मैं ही तो हूं ये', 'तेरी रोशनाई होना चाहती हूँ' (कविता-संग्रह) ० 'सुरक्षित पंखों की उड़ान', 'मुझसे कैसा नेह' (कहानी-संग्रह) ।
दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, मानित विश्वविद्यालय, धारवाड़, कर्नाटक से 'सुरक्षित पंखों की उड़ान में स्त्री-विमर्श' पर शोध ०  प्रतिष्ठित पब्लिक स्कूलों के हिंदी विषय के पाठ्यक्रम से कहानी शामिल ०  आकाशवाणी की विदेश प्रसारण सेवा द्वारा दर्जनों कहानियां नेपाली में अनूदित और प्रसारित ।
विशिष्ट गतिविधियाँ : केंद्रीय हिंदी निदेशालय, मानव संसाधन विकास मंत्रात्तय की हिंदीतर भाषी हिंदी लेखक पुरस्कार योजना में विशेषज्ञ के रूप से शामिल ०  अंतरराष्ट्रीय लेखन से जुडी हिंदी की साहित्यिक पत्रिका 'अक्षरम् संगोष्ठी' की सह-संपादक (मानद और अवैतनिक) ० दिल्ली दूरदर्शन के साहित्यिक कार्यक्रम 'पत्रिका' को विशिष्ट श्रृंखलाओं की प्रस्तोता ०  गत तेरह वर्षों से गणतंत्र दिवस परेड का आंखों देखा हाल सुनाने का गौरव और राष्ट्रीय महत्त्व के अन्य कार्यक्रमों की रेडियों कमेंटेटर ० केंद्रीय सचिवालय हिंदी परिषद की पूर्व साहित्य एवं संस्कृति मंत्री ।
सम्मान : कविता-संग्रह 'मैं ही तो हूं ये' पर हिंदी अकादमी, दिल्ली सरकार द्वारा साहित्यिक कृति सम्मान (2002) ० संसदीय हिंदी परिषद द्वारा संसद के केंद्रीय कक्ष में राष्ट्रभाषा गौरव सम्मान (2009) ०  कविता-संग्रह 'तेरी रोशनाई होना चाहती हूँ' पर परंपरा ऋतुराज सम्मान (2011) ० महात्मा फुले रिसर्च अकादमी, नागपुर द्वारा अमृता प्रीतम राष्ट्रीय पुरस्कार (2011) ०  विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ, भागलपुर की सर्वीच्च मानद उपाधि 'विद्यासागर' (2011)

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