Pyar Botsavana Kee Baarish Jaisa Hey (African Stories)

Urmila Jain

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  • Year: 2016

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Parmeshwari Prakashan

  • ISBN No: 9789380048840

‘प्यार बोत्सवाना की बारिश जैसा है’ अत्यंत संवेदनशील अफ्रीकी कहानियों का हिंदी अनुवाद है। अनुवाद और संपादन उर्मिला जैन ने किया है। वे देशी और विदेशी साहित्य की मर्मज्ञ हैं। पाठक के रूप में जिन रचनाओं ने उनके हृदय को छुआ उन्हें व्यापक पाठक वर्ग के लिए वे इस संकलन में प्रस्तुत कर रही हैं। अनूदित रचनाओं की लोकप्रियता के बावजूद हिंदी में अफ्रीकी कहानियां बहुत कम उपलब्ध हैं। विश्व का यह भाग अपनी संघर्षपूर्ण अभिव्यक्ति के लिए रेखांकित किया जाता है। केन्या, गांबिया, गिनी, नाइज़ीरिया, सेनेगल, बोत्सवाना आदि की रचनाशीलता से उर्मिला जैन ने बारह कहानियां चुनी हैं।
ये कहानियां बताती हैं कि भाषा, देश, पहनावा, आचार, परंपरा आदि की भिन्नताओं के बाद भी मूलभूत समस्याएं और संवेदनाएं तो एक जैसी हैं। अभाव, उपेक्षा, गुलामी, अपमान, निराशा से हर जगह मनुष्य जूझ रहा है। व्यक्ति के भीतर छिपे पाखंड भी हर स्थान पर लगभग समान हैं। संकलन की शीर्षक कहानी के वाक्य हैं, ‘मैंने अपनी पोशाक सावधानी से चुनी थी। अपने भय को सम्मानित रूप में ढका था।’ अनुवाद करते समय उर्मिला जैन ने मूल भाषा के प्रवाह और आशय को भली-भांति संप्रेषित किया है। ‘काली लड़की’ कहानी की डिऔआना का संताप इन पंक्तियों में प्रकट हुआ है, ‘उस रात उसने अपना सूटकेस खोला। उसके अंदर की चीजों को देखा और रोई। किसी ने परवाह नहीं की। फिर भी वह उसी प्रवाह में बहती रही और दूसरों से वैसे ही दूर रही जैसे उसके गांव कासामांस में समुद्र किनारे घोंघे पड़े रहते हैं।’
अपनी प्रखर कथाभूमि और मार्मिक अभिव्यक्ति के कारण ये कहानियां पाठकों को खूब अच्छी लगेंगी। ऐसा लगेगा जैसे वे अपने ही समाज या देश का वृत्तांत पढ़ रहे हैं। ये रचनाएं विचार और संवेदना के वैश्विक सूत्र प्रदान करती हैं।

Urmila Jain

डॉ० उर्मिला जैन
शिक्षा : एम०ए०, डी०फिल० (इलाहाबाद विश्वविद्यालय), प्रथम श्रेणी एवं स्वर्ण पदक प्राप्त ।
प्रकाशन : आधुनिक हिंदी काव्य में क्रांति की विचार-धाराएं', 'साहित्य के नये सदेर्भ : अछूते विषयों पर कुछ विचार' (महेन्द्र राजा जैन के साथ), 'देश-देश में, गांव-गांव  में (यात्रा-वृत्तांत)। हिंदी की प्राय: सभी प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित ।
अन्य : 'नई आजादी', 'जैन बालादर्श' का संपादन । 1965 से 1980 तक विदेश-प्रवास एवं बाद में लगातार विदेश-यात्राएं । लंदन स्थित राष्ट्रीय पुस्तकालय में कार्य । 'ब्रिटिश म्यूजियम तथा 'इंडिया ऑफिस लायब्रेरी' में अनुसंधान ।
बी०बी०सी० से प्रसारण ।
ब्रिटेन तथा आयरलैंड की एकाधिक समाजसेवी अंतर्राष्ट्रीय  संस्थाओं में सक्रिय भागीदारी । 'भारत ज्ञान-विज्ञान समिति' में उत्तर प्रदेश इकाई की अध्यक्षा, 'सर्वेण्ट ऑफ इंडिया सोसायटी' की पूर्व अध्यक्षा ।
इलाहाबाद में निराश्रित महिलाओं के लिए 'शार्ट स्टे होम' और पीडित महिलाओं की सहायता के लिए 'लीगल सेल' की स्थापना तथा अपेक्षित सहायता । महिला संख्या 'मानुषी मंगल' की संस्थापक सदस्या । विगत अनेक वर्षों से महिला उत्थान संबंधो अन्य विविध कार्य ।
गुड़िया संग्रह तथा छायांकन अन्य अभिरुचियाँ ।
संप्रति : संस्कृतिकर्म तथा स्वतंत्र लेखन ।

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