Paap-Punya Se Pare

Rajendra Rao

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  • Year: 2011

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788190820417

Rajendra Rao

राजेन्द्र राव 9 जुलाई, 1944 कोटा, राजस्थान में जन्मे राजेन्द्र राव शिक्षा और पेशे से भले ही मैकेनिकल इंजीनियर रहे हों, मगर उनका मन सदैव साहित्य और पत्रकारिता मेँ ही रमा रहा । साठ के दशक में लघु उद्योगों से कॅरियर की शुरुआत करने के बाद कुछ कंपनियों में तकनीकी व प्रबंधन के क्षेत्र में लंबा समय बिताया । इसके बाद अकस्मात् साहित्यिक पत्रकारिता में आ गए । पहली कहानी 'शिफ्ट' 1971 में 'कहानी' में प्रकाशित हुई । इनके कहानी-संग्रह 'नौसिखिया', 'कीर्तन तथा अन्य कहानियाँ', 'कोयला भई न राख', 'असत्य के प्रयोग', 'दूध के दांत' और प्रेम कथा श्रृंखला 'सूली ऊपर सेज पिया की' खूब चर्चित रहे । 'कितने शीरीं हैं तेरे लब कि' उनका नवीनतम बहुप्रशंसित कहानी-संग्रह है । उपन्यास 'ना घर तेरा ना घर मेरा' और 'खाला का घर नाहिं' को पठनीयता के लिए प्रशंसा मिली । इनके रेखाचित्र और रिपोर्ताज देश-विदेश में सराहे गए हैं । संप्रति : 'दैनिक जागरण' में साहित्य संपादक ।

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