Meri Pratinidhi Kahaniyan

Santosh Shelja

Availability: In stock

Seller: KGPBOOKS

Qty:
100.00 90 + Free Shipping


  • Year: 2010

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Amarsatya Prakashan

  • ISBN No: 9788188466726

मेरी प्रतिनिधि कहानियाँ
राकेश के घर पर जैसे आँसुओं का समंदर ही उमड़ आया था। सुदर्शना को उस समुद्र में डूबते जहाज-सा वह ताबूत दिखाई दिया, जिसमें उसका ‘सब कुछ’ था। आज उसे न माँ-बाप की ममता बाँध सकी, न ही सास-ससुर की लाज रोक सकी। आँधी की तरह वह आगे बढ़ी और ससुर के साथ खड़ी हो गई, "मैं भी कंधा दूँगी।"
दुल्हन-सी सजी सुदर्शना को देख सैनिक भी हक्के-बक्के रह गए। सब चौंक उठे, "क्या कहती है लाड़ी ? पगला गई है ? ऐसा भी कभी हुआ है आज तक ?"
जवाब में सुदर्शना ने और कसकर अरथी को पकड़ लिया। उसकी चुप्पी जैसे बोल उठी, ‘आज तक ऐसा शहीद भी न हुआ था कभी। मैंने बचपन से हर पल जिसका साथ दिया, आज उसकी अंतिम यात्रा में साथ कैसे छोड़ दूँ ?’
अरथी उठाकर लोग चल पडे़। ‘कारगिल का शहीद राकेश अमर रहे!’ के घोष से गूँज उठा धरती-आकाश।
तभी वह रुक गई, "ठहरो, जरा...स्वेटर...स्वेटर..."
उसने माँ की ओर देखते हुए पुकारा। माँ तीर की तरह आगे आई और एक नया बुना स्वेटर लाकर उसे दे दिया। उसने उसे खोला और बड़े प्यार से अपने पति की छाती पर सजा दिया। बोली, "तुमने चिट्ठी में लिखा था। मैंने तैयार कर रखा है। इसे पहनकर जाओ। अब ठंड न लगेगी।"
-[इसी संग्रह की कहानी ‘स्वेटर’ से]

Santosh Shelja

संतोष शैलजा
अमृतसर (पंजाब) के एक गाँव में जन्म  संतोष शैलजा ने दसवीं तक शिक्षा वहीं प्राप्त की । भारतविभाजन की त्रासदी के पश्चात माता-पिता सहित दिल्ली आ गई । यहीं पर उच्च शिक्षा- एम०ए०, बी०एड० तक-ग्रहण की और कुछ वर्ष अध्यापन-कार्य किया । फिर श्री शान्ता कुमार है विवाहोपरांत पालमपुर, हिमाचल प्रदेश में रहने लगी । पति-पत्नी दोनों को लेखन में रुचि होने से दोनों की दस-दस पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है ।
संतोष शैलजा की कुछ उल्लेखनीय पुस्तकें है :
उपन्यास : 'कनक छड़ी',  'अंगारों में फूल', 'निन्नी'
कहली-संग्रह : 'जौहर के अक्षर', ज्योतिर्मयी', 'पहाड़ बेगाने नहीं होंगे'
कविता-संग्रह : 'ओ प्रवासी मीत मेरे'
अन्य पुस्तकें : 'धोलाधार', 'हिमाचल की लोककथाएँ'

Scroll