Maanush Gandh

Suryabala

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  • Year: 2010

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170166030

मानुष-गंध
अपने इस कथा-संग्रह में सूर्यबाला फिर से कथ्य और शिल्प के अपने पुराने प्रतिमानों को तोड़ती नजर आती हैं।
एक तरफ ‘क्रासिंग’ और ‘क्या मालूम’ जैसी कहानियाँ स्त्री-पुरुष संबंधों के कुछ अनूठे और अबोध रहस्यों को थहाती हैं तो दूसरी तरफ ‘जश्न’ और ‘तिलिस्म’ भावुकता को थिराते हुए एक विरल कथा-रस की सृष्टि करती हैं।
कुछ ऐसा लगता है जैसे लेखन में चलने वाले ट्रेंड, फैशन से सूर्यबाला को परहेज-सा है। लेकिन इसका अर्थ, समय की तल्ख सच्चाइयों से मुकरना या उन्हें नकारना हर्गिज नहीं है। इसी तरह अपनी कहानियों के कैनवस पर, ‘लाउड’ और अतिमुखर रंग-रेखाओं के प्रयोग से भी बचती हैं वे। उनके पात्रों के विरोध और संघर्ष मात्र विध्वंसक न होकर विश्वसनीय और विवेकसम्मत होने पर ज्यादा जोर देते हैं।
सिद्धांतों, वादों और आंदोलनों के ऊपरी घटाटोपों से बचती हुई जिजीविषा की भरपूर मानुष-गंध लेकर चलती हैं इस संग्रह की कहानियाँ।

Suryabala

सूर्यबाला 

जन्म : 25 अक्तूबर, 1943, वाराणसी
शिक्षा : एम.ए., पी-एच.डी., काशी हिंदू वि.वि., वाराणसी

प्रकाशित कृतियाँ : मेरे संधि-पत्र, सुबह के इंतजार तक, अग्निपंख, यामिनी-कथा, दीक्षांत (उपन्यास) ० 'एक इन्द्रधनुष, दिशाहीन, थाती भर चांद, मुंडेर पर गृह-प्रवेश, सांझवाती, कात्यायनी संवाद, इक्कीस कहानियां, पांच लंबी कहानियां, सिस्टर! प्लीज आप जाना नहीं, मानुष-गंध, वेणु का नया घर, प्रतिनिधि कहानियां, सूर्यबाला की प्रेम कहानियां, इक्कीस श्रेष्ठ कहानियां, समग्र कहानियां आदि (कथा-संग्रह) ० अजगर करे न चाकरी, धृतराष्ट्र टाइम्स, देशसेवा के अखाडे में, भगवान ने कहा था (हास्य-व्यंग्य) ० झगड़ा निपटारक दफ्तर (बालोपयोगी) । 
उपन्यास 'दीक्षांत' तथा 'यामिनी-कथा' क्रमश: स्नातक तथा स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में। ० टी०वी० धारावाहिकों के माध्यम से अनेक कहानियां, उपन्यासों तथा हास्य-व्यंग्यपरक रचनाओं के रूपान्तर प्रस्तुत, जिनमें पलाश के फूल, न किन्नी न, सौदागर, एक इन्द्रधनुष जुबैदा के नाम, सबको पता है, रेस, निर्वासित आदि प्रमुख हैं ० 'सजायाफ्ता' कहानी पर बनी टेलीफिल्म को वर्ष 2007 का सर्वश्रेष्ठ टेलीफिल्म पुरस्कार । ० कोलंबिया विश्वविधालय (न्यूयॉर्क), वेस्तइंडीज विश्वविधालय (त्रिनिदाद) एवं  नेहरू सेंटर (लंदन) से कहानी एव व्यंग्य रचनाओं का पाठ । ० न्यूयॉर्क के शब्द-स्टार टी०वी० चैनल पर कहानी एवं व्यंग्य-पाठ ।
सम्मान : प्रियदर्शिनी पुरस्कार, घनश्यामदास सराफ पुरस्कार, दक्षिण भारत प्रचार सभा, काली नागरी प्रचारिणी सतपुडा लोक संस्कृति, अभियान, मुंबई विद्यापीठ, व्यंग्यश्री पुरस्कार, रत्नीदेवी गोइन्का वाग्देवी पुरस्कार, राजस्थान लेखिका मंच वाग्मणि सम्मान, आजीवन उपलब्धि सम्मान, स्वजन, हरिशंकर परसाई स्मृति सम्मान, अभियान (उत्तर भारतीय संघ) आदि ।

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