Katha Ek Naami Gharaane Ki

Hridyesh

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  • Year: 2015

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Parmeshwari Prakashan

  • ISBN No: 9789380048925

हृदयेश की कहानियां जिंदगी से, खासकर उस जिंदगी से, जिसमें मुक्तिबोध के मुहावरे के अनुसार आदमी जमीन में धंसकर भी जीने की कोशिश करता है, पैदा हुई हैं। कुछ लेखक सीधे जमीन फोड़कर निकलते हैं। उसी में अपनी जड़ों का विस्तार करते हैं और नम्र भाव से अपने रेशे-रेशे से उस जमीन से ही अपनी शक्ति खाद-पानी लेकर बढ़ते हैं और अपने तथा जमीन के बीच आसमान को नहीं आने देते हैं। वे इस सत्य को बखूबी समझते हैं कि आसमान जितना भी ऊंचा हो, उस पर किसी के पांव नहीं टिकते। औंध लटका हुआ बिरवा तो किसी को छाया तक नहीं दे सकता। हृदयेश् कलम से लिखते हैं तो भी लगता है जैसे कोई जमीन पर धूल बिछाकर उसपर अपनी उंगली घुमाता हुआ कोई तस्वीर बना रहा है। उनकी उंगलियों के स्पर्श में ही कुछ होगा कि आंघियां तक वहां आकर विराम करने लगती हैं और उनकी लिखत, जिसने भाड लेख होने तक का भ्रम नहीं पाला था, शिलालेख बनने के करीब आ जाती है।
हृदयेश ने बीच-बीच में आने वाले तमाम साहित्यिक आंदोलनों व फैशनों को गुजर जाने दिया बिना अपने लेखकीय तेवर या प्रकृति में बदलाव लाए हुए। वह चुनाव पूर्वक अपनी जमीन पर टिके रहे–न दैन्यं न पलायनम्। वह एक साथ कई परंपराओं से जुड़ते हैं क्योंकि प्रत्येक रचनाकार अपने वरिष्ठों, समवयस्कों, यहां तक कि अल्पवयस्कों की कृतियों के प्रभाव को अपनी अनवधनता में सोख लेता है, जैसे पौधें की जड़ें खाद के रस को सोख लेती हैं।

Hridyesh

हृदयेश
पूरा नाम : ह्रदय नारायण मेहरोत्रा
जन्म : 1930
प्रकाशित कृतियाँ -
उपन्यास : 'गाँठ' (1970), 'हत्या' (1971), 'एक कहानी अंतहीन' (1972), 'सफेद घोड़ा काला सवार" (1976), 'सांड' (1981), 'नास्तिक' (अनुवाद : 1984), 'पुनर्जन्म' (1985), 'दंडनायक' (1990), "पगली घंटी’ (1995), किस्सा हवेली' (2004)
कहानी-संग्रह : 'छोटे शहर के लोग' (1972), "अँधेरी गली का रास्ता' (1977), 'इतिहास' (1981), 'उत्तराधिकारी' (1981), 'अमरकथा' (1984), 'प्रतिनिधि कहानियाँ' (1988), 'नागरिक' (1992), 'रामलीला तथा अन्य कहानियां' (1993), 'सम्मान' (1996), 'जीवनराग' (1999), 'सन् उन्नीस सौ बीस' (1999), 'उसी जंगल समय में' (2004)
'सफेद घोड़ा काला सवार' तथा 'सांड' उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा पुरस्कृत, प्रतिबद्ध सृजन-यात्रा के लिए 1993 के 'पहल सम्मान' से सम्मानित।

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