Hinsaabhas

Deepak Sharma

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  • Year: 1993

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Himachal Pustak Bhandar

  • ISBN No: 111-11-1111-111-1

हिंसाभास
सामाजिक परिवेश में रची-बसी इस संग्रह की कहानियाँ आज के संघर्षरत मानव की मर्मान्तक पीडा का चित्रण अत्यन्त मर्मस्पर्शी तथा हृदयबेधक भाषाशैली में करती हैं । हमारे दैनंदिन जीवन में विषमता, नीरसता और विरक्ति का जो जहर घुल चुका है उससे हमें आगाह भी करती हैं। मानव-मानव के बीच बढती विषमता और कटुता की खाई को यदि समय रहते पाटा न गया, और सौहार्द व सदभात्र की भावना को न रोपा गया तो हम विघटन और विनाश की जोखिम-भरी जिन्दगी जीने के लिए बाध्य होकर रह जायेगे ।

Deepak Sharma

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