Ek Thi Sara

Amrita Pritam

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  • Year: 2012

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Jagat Ram & Sons

  • ISBN No: 9788188125531

एक थी सारा

मेरी तहरीरों से कई घरों ने मुझे थूक दिया है
लेकिन मैं उनका जायका नहीं बन सकती
मैं टूटी दस्तकें झोली में भर रही हूँ
ऐसा लगता है पानी में कील ठोक रही हूँ
हर चीज़ बह जाएगी—मेरे लफ्ज, मेरी औरत
यह मशकरी गोली किसने चलाई है अमृता !
जुबान एक निवाला क्यूँ कुबूल करती है ?
भूख एक और पकवान अलग-अलग
देखने के लिए सिर्फ 'चाँद सितारा' क्यूँ देखूँ ?
समुंदर के लिए लहर ज़रूरी है
औरत के लिए जमीन जरूरी है
अमृता ! यह ब्याहने वाले लोग कहाँ गए ?
यह कोई घर है ?
कि औरत और इजाजत में कोई फर्क नहीं रहा... 
मैंने बगावत की है, अकेली ने,
अब अकेली आंगण में रहती हूँ
कि आजादी से बड़ा कोई पेशा नहीं
देख ! मेरी मज़दूरी, चुन रही हूँ लूँचे मास
लिख रहीं हूँ
कभी मैं दीवारों में चिनी गई,
कभी बिस्तर से चिनी जाती हूँ... 
[इसी पुस्तक से]

Amrita Pritam

अमृता प्रीतम
(वास्तविक नाम-अमृत कौर)
जन्मतिथि : 31 अगस्त, 1919
जन्मस्थान : गुजरांवाला (अब पाकिस्तान में)
प्रकाशित कृतियाँ : उनके हस्ताक्षर, ना राधा ना रुक्मणी, कम्मी और नंदा, रतना और चेतना (उपन्यास); दस प्रतिनिधि कहानियां, अलिफ लैला : हजार दास्तान, कच्चे रेशम सी लड़की (कहानी-संग्रह); रसीदी टिकट (आत्मकथा); खामोशी से पहले (कविता-संग्रह) मेरे साक्षात्कार (सं० : अस्मा सलीम तथा श्याम सुशील), मन मंथन की गाथा (सं० : इमरोज) (साक्षात्कार/लकरीरें); एक थी सारा, काया के दामन में, शक्तिकणों की लीला, काल-चेतना, अज्ञात का निमंत्रण, सितारों के संकेत, सपनों की नीली सी लकीर, अनंत नाम जिज्ञासा (आध्यात्मिक सत्यकथाएँ); सितारों के अक्षर किरनों की भाषा, मन मिर्जा तन साहिबाँ, अक्षर कुण्डली, वर्जित बाग की गाथा (सं० : अमृता प्रीतम), बेवतना (सं० : अमृता प्रीतम) (चिंतन/संस्मरण/रेखाचित्र आदि)।
पुरस्कार-सम्मान : साहित्य अकादेमी पुरस्कार 'सुनेहड़े' (कविता-संग्रह : 1956), भारत के राष्ट्रपति द्वारा पदमश्री सम्मान (1969), भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार 'कागज ते कैनवस' (कविता-संग्रह :  1981) तथा पदमबिभूषण सम्मान (2004) के अलावा अन्य बहुत-से पुरस्कारों-सम्मानों से अलंकृत ।

स्मृति-शेष : 31 अक्तूबर, 2005

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