Brunch Tatha Anya Kahaniyan

Shailendra Sagar

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  • Year: 2014

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9789383233526

सुपरिचित वरिष्ठ कथाकार शैलेन्द्र सागर के इस संग्रह में आज की उपभोक्तावादी संस्कृति के चलते उभरती सामाजिक-सांस्कृतिक टूट-फूट के तहत जटिल विसंगतियों के दुष्चक्र में फंसे पात्रों की कहानियां दर्ज हैं। अधिकांश कहानियों में स्त्री-पुरुष की परंपरागत छवियों के बरक्स उपभोक्तावादी दौर में बुनते-घुनते संबंधें में दिनोदिन पसरते तनावों, अलगावों और नए पनपते रिश्तों की ऐसी अलक्षित सच्चाइयां पूरी प्रामाणिकता के साथ नजर आती हैं जहां पुराने समय की रूढ़ भूमिकाएं धूमिल हैं और बाजारवाद के बदलते दौर में रिश्ते पहले से ज्यादा जटिल, यथार्थपरक और अवसरवादी होते जा रहे हैं। घर-परिवार से लेकर बाहर की दुनिया में संघर्षरत पात्रों की उद्विग्नता, बेचैनी और संवेदना के क्षरित होने की दास्तां यहां पूरी बेबाकी से उकेरी गई है। सच तो यह है कि संक्रमण के इस संवेदनहीन समय में निष्प्रभ पड़ते संबंधें की बारीकी से पड़ताल करती ये कहानियां आश्वस्त करती हैं कि अचूक अवसरवाद की अंदरूनी चालों को समझने के लिए हमें संवेदना संसार में लौटना पड़ेगा जहां आपको दरारों के बीच दिखेगी मुस्कराहट, अनकही टकराहटों के बीच दिखेगी मनुष्यता और हताशा के बीच कहीं से खिल उठेंगी आशा-उल्लास की कोंपलें भी...।
विडंबनापूर्ण स्थितियों से उबरने के लिए रिश्तों की कोमलता को बचाए रखने की मुहिम छेड़ती हैं ये कहानियां...

Shailendra Sagar

शैलेन्द्र सागर 
जन्म: 5 अप्रैल, 1951 को रामपुर, उ. प्र.  
अंग्रेजी साहित्य में एम. ए. करने के बाद तीन वर्ष तक स्नातकोत्तर महाविद्यालय में अध्यापन, 1974 में उ. प्र. 
पी. सी. एस. में चयन और वर्ष 1976 से आई. पी. एस. में सेवा। 2010 में पुलिस महानिदेशक पद से सेवानिवृत्त
विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लगभग सौ कहानियां, लघुकथाएं, व्यंग्य प्रकाशित। अब तक चार उपन्यास (चतुरंग, चलो दोस्त सब ठीक है, एक सुबह यह भी तथा ये इश्क नहीं आसां...) और पांच कहानी-संग्रह प्रकाशित। स्त्री-विमर्श पर दो पुस्तकों का संपादन
कहानी-संग्रह ‘माटी’ पर विजय वर्मा सम्मान व उ. प्र. हिंदी संस्थान द्वारा पुरस्कृत उपन्यास ‘चलो दोस्त सब ठीक है’ पर उ. प्र. हिंदी संस्थान का प्रेमचंद सम्मान, ‘एक सुबह यह भी’ पर संस्थान का अमृतलाल नागर सम्मान एवं ‘कथाक्रम’ पत्रिका पर सरस्वती सम्मान 
वर्ष 2013 में उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा साहित्य भूषण सम्मान से समादृत। 1998 से प्रमुख साहित्यिक त्रैमासिकी ‘कथाक्रम’ का नियमित संपादन

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