Boo Toon Raaji

Padma Sachdev

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  • Year: 2011

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170166535

बू तूँ राजी
मैं मूलत: कवयित्री हूँ । जो बात कविता से बहुत बडी हो जाती है, वह कहानी बनकर मेरे हाथों में छोटे बच्चे की तरह कुलबुलाने लगती है । कहानी की यह मेरी दूसरी किताब है । कभी-कभी लिखती हूँ कहानियाँ, वह भी उस वक्त, जब कहानियों के पात्र मेरे आँचल का कोना पकडे-पकडे मेरी गरदन तक आकर मुझे दाब लेते है । और ये पात्र जब मेरे जीवन का हिस्सा हो जाते हैं तब में लफ्जों के दोने में इन्हें फूलों की तरह सजाकर अपने पाठकों की झोली में डाल देती हूँ फिर वे इसका हार बनाएँ, फूलों को मंदिर के आगे सजाएँ या अपनी आँखों की पतली काजल की लकीर से पिरोकर अपने गले में डालें-ये उनकी खुशी है । मेरी कहानियों के पात्र मेरे घर के सदस्यों की तरह हो जाते हैं । मैं चाहती हूँ, आप भी इन्हें अपनी बैठक में बैठने का स्वान दें ।

Padma Sachdev

पद्मा सचदेव 
जन्म : 17 अप्रैल, 1940, जम्मू
पिता प्रो० जयदेव शर्मा हिंदी-संस्कृत के विद्वान् थे । बचपन से ही उन्होंने पद्मा को श्लोक याद करवाए थे, जिनका वह बहुत स्पष्ट उच्चारण करती थीं । संस्कृत की लयात्मकता को गीतात्मकता और संस्कृत भाषा का सौंदर्य जैसे पद्मा की रूह में समा गया और सात वर्ष की छोटी उम्र में पिता का साया सिर से उठ जाने पर उनके भीतर जो खला पैदा हुआ उसे संस्कृत के शब्दों ने भरा और उसी में से कविता ने हृदय में घर कर लिया । डोगरी  लोकगीतों की अलौकिक डोर थामकर पद्मा  ने कविता के आसमान को छुआ । आज लोग इन्हें डोगरी की पहली कवयित्री के रूप में जानते हैं ।

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