Basant Bayar

Nisha Bhargva

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  • Year: 2012

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Surabhi Prakashan

  • ISBN No: 9789380631509

कहानी साहित्य की एक सशक्त विधा है। नवरसों को संजोए ये कहानियां पाठक के मन को हलराती-दुलराती, हंसाती, रुलाती, गुदगुदाती और स्पंदित करती हैं । आसपास की विसंगतियों को रेखांकित करती, दलदल में भी जीवन के पद और सूत्र ढ़ूंढ लेती है । विभिन्न जीवन दशाओं के उकेरती, जीने की सही दिशा देती हैं । कहानी कहना भी एक कला है ।
हंसाना एक कला है । जो हंसा सकता है, उसमें रुलाने की भी भरपूर ताकत होती है। आँसू, भावनाओं का सिंचन करते है । रचना के लिए भावों का सिंचन आवश्यक है । इसलिए तो मनुष्य जीवन में हंसने-हंसाने के साथ रोने-रुलाने का भी महत्व है।
निशा भार्गव को कहानियां, मानो हंसाते-हंसाते रुला देती हैं । जीवन की विसंगतियों पर हंसाती, जीवन का सत्य बखान कर जाती हैं । 'बसंत बयार' संग्रह की कहानियां निशा भार्गव के दादी बनने को उम्र में भले ही प्रकाशित हो रही हैं, लेखिका की उम्र के विभिन्न पड़ावों पर उसे ही उद्वेलित, रोमांचित और सुखाश्चर्य से भरती रहीं हैं । आसपास में बिखरे, टूटते-बिखरते-जुड़ते पारिवारिक ताने-बानों की ये कहानियां हैं। संग्रह को यही विशेषता है।
एक-एक कुटुम्ब (परिवार) को दुरुस्त करके ही पुन: "वसुधैव-कुंटुम्बकम्" का भारतीय सनातन आदर्श सार्थक होया।  ये कहानियां कुछ ऐसा ही प्रयास करती दिखती हैं। निशा भार्गव की उनकी अर्थवान कहानियां और लेखकीय ईमानदार प्रयास के लिए बधाइयाँ । पाठकों से अपेक्षा है कि वे पढे, गुने और पन्नों पर बिखरे जीवन जोड़ने वाले तत्वों को सहेज लें ।

Nisha Bhargva

अजमेर (राजस्थान) में पली बढी निशा भार्गव ने अर्थशास्त्र में एस.ए. किया । राजस्थान विश्वविद्यालय से स्वर्णपदक जीत कर अपने विद्यालय व महाविद्यालय की सर्वश्रेष्ठ छात्रा कहलाने का गौरव प्राप्त किया । अपने महाविद्यालय से स्वर्ण एवं रजतपदक प्राप्त किये तथा आठ वर्षों तक राष्ट्रीय छात्रवृत्ति प्राप्त की ।
भूतपूर्व प्राध्यापिका एवं सदैव प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने वाली निशा भार्गव ने अनेक पुरस्कार प्राप्त किए। विविध मंचों पर काव्यपाठ के साथ-साथ निशा भार्गव ने 1996 में राष्ट्रपति पवन में भी काव्यपाठ किया तथा भारत की प्रथम महिला श्रीमती विमला रगर्मा द्वारा सम्मानित हुई ।
'अनकहे पल' आपका सम्मिलित काव्य संग्रह है । 'उधार की मुस्कान' (2000), 'अच्छे फंसे' ( 2003) , 'चिकने घडे' (2006), 'बंटाधार' (2010) , 'घनचक्कर' (2012) हास्य व्यंग्य काव्य संग्रह हैं । 'तिनके-तिनके' (लघु कथा संग्रह) 2012 तथा 'बसंत बयार' 2012 (कहानी संग्रह) प्रस्तुत है। 
कल्पतरु संस्था दिल्ली द्वारा 1999 में 'कविता विदुषी' पुरस्कार मक्खनलाल शांतिदेवी ट्रस्ट द्वारा 2002 में हास्य-व्यंग्य लेखन हेतु सम्मानित , भारतीय साहित्यकार संसद बिहार द्वारा 2005 में 'हरिशंकर परसाई राष्ट्रीय शिखर साहित्य सम्मान', अखिल भारतीय राष्ट्रभाषा विकास संगठन एवं यू.एस.एम. पत्रिका गाजियाबाद द्वारा 2006 में सुभद्रा कुमारी चौहान स्मृति सम्मान, महिला मंगल संस्था दिल्ली द्वारा 'साहित्य प्रतिभा सामान' 2006, भारतीय साहित्यकार संसद बिहार द्वारा 2007 में काका हाथरसी साहित्य सम्मान, कवितायन संस्था द्वारा 'साहित्य सृजन सम्मान' 2011 प्राप्त हुए।
आकाशवाणी व दूरदर्शन के विविध कार्यक्रमों से लगातार जुडाव । कविता, कहानी, वार्ता, समीक्षा तथा साक्षात्कार का प्रसारण । टेलीविजन के 'वाह-वाह" कार्यक्रम (SAB), 'अर्ज किया है' (NDTV), "उठो जागो’ (प्रज्ञा टीवी) तथा दूरदर्शन की काव्यगोष्टियो में काव्य पाठ करने का अवसर मिला

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