Puraan Gatha

Sudarshan Vashishath

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  • Year: 2010

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Himachal Pustak Bhandar

  • ISBN No: 9788188123049

पुराण गाथा
हमारे देश में हिमालय वह भू-भाग है, जहाँ वेद-पुराण रचयिता ऋषि-मुनियों ने वास किया । हमारा पौराणिक साहित्य भी विवित्र है । जितना काल्पनिक लगता है, उतना ही व्यावहारिक है । जितना यथार्थवादी है, उतना ही प्रतीकात्मक भी है । समस्त साहित्य काव्यमय होने के कारण कई बार अतिजशयोक्ति का भ्रम देता है, किंतु कल्पना त्तत्त्व को हटा देने पर एकाग्र यथार्थवादी से जाता है । इस साहित्य में सर्वाधिक यथार्थवादी रचना महाभारत है, जिसमें हर पात्र, हर घटना को यथार्थवादी दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है । किसी भी आदर्श पात्र को कहीं पर बक्शा नहीं गया है ।
प्रस्तुत है, सहज-सरल भाषा में हिमालय क्षेत्र की रोचक गाथाएँ ।

Sudarshan Vashishath

सुदर्शन वशिष्ठ
जन्म  : 24 सितंबर, 1949, पालमपुर (हि०प्र०) के एक गाँव में
प्रकाशान : 'अंतरालों में घटता समय’, 'सेमल के फूल', 'पिंजरा', 'हरे-हरे   पतों का घर', 'संता  पुराण', 'कतरनें' (कहानी-संग्रह); चुनिंदा कहानियों के तीन संग्रह प्रकाशित; 'आतंक', 'सुबह की नींद’ (उपन्यास) 'युग परिवर्तन, 'अनकहा' (काव्य-संकलन); 'अर्द्धरात्रि का सूर्य’ , 'नदी और रेत’ (नाटक); 'व्यास की धारा', 'कैलास पर चाँदनी', 'पर्वत से पर्वत तक', 'रंग बदलते पर्वत', 'पर्वत मंथन', 'हिमाचल', 'हिमाचल की लोककथाएँ', 'ब्राह्यणत्व : एक उपाधि', 'पुराण गाथा', 'देव संस्कृति' (संस्कृति शोध तथा यात्रा) 'हिमाचल संदर्भ कोष' (आठ खंडों में शीघ्र प्रकाशित)
दो काव्य-संकलन, चार कहानी-संग्रहों का संपादन । तीन पत्रिकाओं  तथा चार दर्जन से ऊपर सरकारी पुस्तकों का संपादन देश की वर्तमान तथा विगत शीर्षस्थ पत्र-पत्रिकाओँ में रचनाएँ प्रकाशित
जम्मू अकादमी, हिमाचल अकादमी, साहित्य कला परिषद दिल्ली सहित कई स्वैच्छिक संस्थाओं द्वारा साहित्य-सेवा के लिए सम्मानित

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