Beeswin Sadi Ki Laghu Kathayen-2

Balram

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  • Year: 2010

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Amarsatya Prakashan

  • ISBN No: 9788188466177

बीसवीं सदी की लघुकथाएं-2
जैसी लघुकथाओं की कल्पनाएं और कामनाएं हम आठवें-नवें दशक में करते रहे, वैसी लघुकथाएं लिखते रहे हिमाचल प्रदेश के प्रतिष्ठित कथाकार सुदर्शन वशिष्ठ, मध्य प्रदेश के पवन शर्मा और उन्नी, उत्तर प्रदेश के असग़र वजाहत, गंभीरसिंह पालनी, पंजाब के तरसेम गुजराल और कमलेश भारतीय, बिहार के चंद्रमोहन प्रधान, जम्मू के ओम गोस्वामी, राजस्थान के मोहरसिंह यादव, हसन जमाल और महाराष्ट्र के दामोदर खड़से, लेकिन कितना क्रूर मजाक हुआ हिंदी लघुकथा के साथ कि लघुकथा के स्वयंभू मसीहाओं ने इन तेजस्वी कथाकारों की लघुकथाओं पर प्रायः नजर ही नहीं डाली, डाली भी तो उन पर चर्चा नहीं की और चर्चा की भी तो निगेटिव। कई कथाकारों को ‘बाहरी’ कहकर उनके लघुकथा-लेखन को खारिज करने की कोशिश की। इन सशक्त लेखकों की लघुकथाओं के सामने उनकी लघुकथाएं रखते ही उनकी अल्पप्राणता उजागर हो गई, लेकिन अब अच्छे और सच्चे रचनाकारों की लघु- कथाओं के इस संकलन में आ जाने से उन पर चर्चा और समीक्षा के क्रम को रोका नहीं जा सकेगा। अब प्रेमचंद, प्रसाद एवं राजेंद्र यादव जैसे कहानीकारों की भी लघुकथाएं हमारे सामने हैं। उन अल्पप्राण प्रतिभाओं के कारण ही शायद कोई भला आदमी इधर आने और काम करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया, लेकिन बीसवीं सदी के बीतते न बीतते प्रमुख कथाकारों की लघुकथाओं के प्रस्तुत संचयन को देखकर पाठक कह सकते हैं : कौन कहां कितने पानी में, सबकी है पहचान मुझे। ऐसी बातें कहने के लिए बाध्य कर देने वाले कथाकार सुदर्शन वशिष्ठ की यादगार लघुकथा ‘पहाड़ पर कटहल’ पढ़कर एक पुरानी बात सही जान पड़ने लगी है कि महान् रचनाएं ही आलोचक को लुभाती हैं और वही उसे प्रेरित करती हैं कि वह उनका विश्लेषण करे, रचनात्मकता की हर संभव ऊंचाई के संदर्भ में उन्हें देखे-परखे और पाठकों को बताए कि कौन लेखक कितना बड़ा है, दूसरे उससे छोटे, और कितने छोटे, बल्कि नगण्य क्यों हैं? प्रस्तुत संचयन हिंदी लघुकथा की आलोचना के मान-प्रतिमान गढ़ने लायक बहुत-सी उत्तम रचनाओं का ऐसा दुर्लभ खजाना है, जो हिंदी में इससे पहले कभी भी और कहीं भी उपलब्ध नहीं था। उम्मीद है कि पाठक इसे संजोकर रखेंगे अपने पास, अपने साथ।

Balram

बलराम
उत्तर प्रदेश में बिठूर के पास स्थित गांव भाऊपुर में 15 नवंबर, 1951 को जन्मे बलराम एम.ए. अधूरा छोड़कर हिंदी दैनिक 'आज' में फीचर संपादक हो गए, जहां से 'रविवार' और 'करंट' साप्ताहिक के लिए उत्तर प्रदेश की रिपोर्टिंग भी करते रहे । फिर टाइम्स ऑफ़ इंडिया की पत्रिका 'सारिका' के संपादक मंडल से संबद्ध हुए। दिल्ली आकर यहीं से हिंदी में एम.ए. किया । बाद में 'नवभारत टाइम्स' के चीफ-सब एडीटर बने । 'भूमिका', 'शिखर' और 'शब्दयोग' के बाद समाचार पाक्षिक 'लोकायत' का संपादन । कृतियां : कलम हुए हाथ, गोआ में तुम, मृगजल, अनचाहे सफ़र तथा सामना (कथा संग्रह), जननी- जन्मभूमि और आवागमन (उपन्यास), माफ करना यार (आत्मकथा), औरत की पीठ पर (रिपोर्ताज), हिंदी कहानी का सफर, आंगन खड़ा फकीर, आधे-अधूरे परिचय (आलोचना), वैष्णवों से वार्ता (इंटरव्यूज) तथा धीमी-धीमी आंच (संस्मरण) आदि प्रकाशित । कारा (उपन्यास) शीघ्र प्रकाश्य । संपादन : दुनिया की प्रमुख भाषाओँ की कथाओं के अनुवाद और संचयन 'विश्व लघुकथा कोश', 'भारतीय लघुकथा कोश' और 'हिंदी लघुकथा कोश' प्रकाशित । दर्जनाधिक अन्य पुस्तकों का भी संपादन किया ।
सम्मान : केंद्रीय हिंदी संस्थान से सृजनात्मक लेखन और पत्रकारिता के लिए 'गणेशशंकर विद्यार्थी स्रम्मान' । हिंदी अकादमी से 'साहित्यकार सम्मान' । संस्मरण के लिए बिहार से 'नई धारा रचना सम्मान' । उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से रिपोर्ताज के लिए' अज्ञेय पुरस्कार' । मध्य प्रदेश से प्रेमचंद पुरस्कार । दिल्ली और उत्तर प्रदेश शासन से कुछ साहित्यिक कृति पुरस्कार भी मिले ।

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