Varanch

Raj Kumar Gautam

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  • Year: 1997

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Parmeshwari Prakashan

  • ISBN No: 1111111111111

वरंच
यदि ध्यान से देखा जाये तो हमारा समकालीन जीवन बहुविध विडम्बनाओं से भरा हुआ है । सुबह हाथ-मुँह धोने से लेकर रात-गये बिस्तर पकड़ने तक हम उन विडम्बनाओं से गुजरते है और अगर संवेदनक्षम हुए तो उन्हें महसूस भी करते है।  लेकिन बावजूद इस सबके हम उन तमाम सामाजिक, आर्थिक सांस्कृतिक और राजनीतिक मूल्यों क्रा विश्लेषण नहीं कर पाते जो उनके कारण स्वरूप हैं अथवा व्यंग्यात्मक स्थितियों का निर्माण करते हैं। वरंच में संगृहीत इन व्यंग्य कथाओं  को इसी नजरिये से पढा जाना अपेक्षित है ।
सुपरिचित साहित्यकार राजकुमार गौतम के ये व्यंग्य-रचनाएँ शहरी मध्यवर्ग के जिस वेतनभोगी संसार को हम पर खोलती है, उसकी त्रासदी को महज उसी तक सीमित रहकर नहीं देखा जा सकता, बल्कि इसके लिए उसके बाहर आना होगा; क्योंकि उसके अंतर्सूत्र समूचे समाज में गूँथे हुए है । राजकुमार गौतम बहुत सहज भाव से इस सच्चाई की ओर संकेत करते चलते हैं । वे इन सूत्रों को एक ऐसी भाषा-शैली में उजागर करते है जो हमें अनायास ही हमारे साक्षात्कार तक पहुँचाने में समर्थ है ।
साहित्य, कला, संस्कृति तथा अन्याय दृश्य-विधाओं की विसंगतियों की कोख से उपजी ये व्यंग्य-कथाएँ अपने लहजे में तो अनूठी हैं ही भाषा के स्तर पर भी परिपक्व हैं। व्यंग्यकार के इस प्रयास में पाठक को मानो वह सब कुछ प्राप्त हो जाता है जो बरसों से उसके मन में कहीं उमड़-घुमड़ रहा होता है । पाठक तथा लेखक की यह 'परस्परता' ही इस व्यंग्य-संकलन के एक और उपलब्धि कही जा सकती है ।

Raj Kumar Gautam

राजकुमार गौतम 
जन्म : 1 अगस्त, 1955 (कनखल, हरिद्वार)
शिक्षा : बी०ए० (मेरठ विश्वविद्यालय)
कृतियाँ-
कहानी-संग्रह : काल दिन ०  उत्तरार्द्ध की मौत ०  आधी  छुट्टी का इतिहास ०  दूसरी आत्महत्या ० आक्रमण तथा अन्य कहानियां ०  कब्र तथा अन्य कहानियाँ
उपन्यास : ऐसा सत्यव्रत ने नहीं चाहा था
व्यंग्य कथा-संग्रह : वरंच ०  अँगरेज़ी की रंगरेजी 
संपादित संग्रह : आठवें दशक  के कहानीकार, सीपियां
नाट्य रूपांतर : सूत्रगाथा (मूल  : मनीषराय)
सहयोगी कृतियाँ : अंतर्यात्रा (इंटरव्यू) ०  सामना (कहानियाँ) धीरेन्द्र अस्थाना तथा बलराम के साथ
अन्य : लगभग 60 संपादित पुस्तके,  सहयात्री लेखक; 'आधी छुट्टी का इतिहास' को हिंदी अकादमी, दिल्ली  द्वारा कृति पुरस्कार (1986); 'आक्रमण तथा अन्य कहानियाँ' को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा यशपाल पुरस्कार (1990) सैंकडों पुस्तकों/पत्रिकाओं पर लिखी गई समीक्षात्मक टिप्पणियों का विभिन्न स्तरीय पत्र- पत्रिकाओं में प्रकाशन

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