Maalish Mahapuran

Sushil Sidharth

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  • Year: 2015

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9789385054440

मैं समदर्शी हूं। योग्यता को अयोग्यता पीटती रहे, मुझे फ़र्क नहीं पड़ता। सड़क के किनारे कोई सहायता के लिए तड़पता रहे तो मैं समझता हूं कि वह आत्मशक्ति बटोरने का अभ्यास कर रहा है। किसी भी मरते हुए व्यक्ति में मुझे मोक्ष या निर्वाण के अगोचर बिंब दिखने लगते हैं। ...कोई व्यक्ति अपनी देह की भूख मिटाने का प्रयास कर रहा है और स्त्री चीख रहीं है। मैं यह नहीं देख सकता। स्त्री कितनी बुरी और नासमझ लग रही है। अरे इक दिन बिक जाएगा माटी के मोला यह नश्वर शरीर किसी काम तो आए। ...मुझे जो दिख रहा है वह नई सभ्यता का प्रसाद है। प्रसाद को प्रमादग्रस्त लोग ही समस्या कह रहे हैं।
उनके जीवन में बहुत संघर्ष है ऐसा उन्होंने एक अवसरवादी आह भरकर कहा। दरअसल इस देश में कुछ लोगों ने दु:ख और संघर्ष को अच्छी नस्ल वाले कुत्ते पाल रखे है, जिले वे सुबह-शाम टहलाने ले जाते है। कोई गोष्ठी हुई तो उसमें ले आते हैं ।
सच में भारतीय संस्कृति की यह उत्तर आधुनिकता नहीं, दक्षिण आधुनिकता है । बहू को जलाने/मारने के बाद इसी मंदिर पर अखंड रामायण का आयोजन होता है। यही लड़किया प्रार्थना करती है कि है प्रभु। हमें सुरक्षित रखो। यहीं उसी प्रभु से अरदास होती है कि हमें बलात्कार के लिए लड़कियां दो । प्रभु सबकी सुनता है । 
[इसी पुस्तक से]

Sushil Sidharth

सुशील सिद्धार्थ 
 जन्म : 2 जुलाई, 1958, ग्राम भीरा , जिला सीतापुर ( उ.प्र. )
शिक्षा : हिंदी साहित्य में पी-एच डी.
प्रकाशित पुस्तकें : 'प्रीति न करियो कोय', 'मो सम कौन', 'नारद की चिंता (व्यंग्य संग्रह) ० 'बागन- बागन कहै चिरैया', ' एका' (अवधी कविता संग्रह)
संपादित पुस्तकें : 'श्रीलाल शुक्ल संचयिता', 'मेरे साक्षात्कार : शिवमूर्ति', 'मेरे साक्षात्कार : मन्नू भंडारी', 'दस प्रतिनिधि कहानियां : उषाकिरण खान', 'दस प्र तिनिधि कहानियां : ऋता शुक्ल', 'प्रतिनिधि कहानियां : चित्रा मुद्ल', 'हिंदी कहानी का युवा परिदृश्य' ( 3 खंड)
व्यंग्य और आलोचना में सक्रिय
कई समाचार-पत्रों व पत्रिकाओं में स्तंभ लेखन । पर्याप्त मीडिया लेखन
'उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान' से दो बार व्यंग्य और दो बार अवधी कविता हेतु नामित पुरस्कार । आलोचना के लिए 'स्पंदन सम्मान'
'व्यंग्य लेखक समिति' (वलेस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष

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