Kaag Ke Bhaag Bare

Prabha Shanker Upadhayaye

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  • Year: 2010

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Amarsatya Prakashan

  • ISBN No: 9788188466634

काग के भाग बड़े
व्यंग्य को भले ही लेटिन के ‘सेटुरा’ से व्युत्पन्न बताया गया हो, किंतु भारत के प्राचीन साहित्य में व्यंग्य की बूझ रही है। ऋग्वेद में मंत्रवाची मुनियों को टर्राने वाले मेढकों की उपमा दी गई है। भविष्येतर पुराण तथा भर्तृहरिशतकत्रयं में खट्टी-मीठी गालियों के माध्यम से हास्य-व्यंग्य प्रसंग उत्पन्न किए हैं— ‘गालिदानं हास्यं ललनानर्तनं स्फुटम्’, ‘ददतु ददतु गालीर्गालिगन्तो भवन्तो’। वाल्मीकि रामायण में मंथरा की षड्यंत्र बुद्धि की कायल होकर, कैकेयी उसकी अप्रस्तुत प्रशंसा करती है, "तेरे कूबड़ पर उत्तम चंदन का लेप लगाकर उसे छिपा दूँगी, तब तू मेरे द्वारा प्रदत्त, सुंदर वस्त्र धारण कर देवांगना की भाँति विचरण करना।" रामचरितमानस में भी ‘तौ कौतुकिय आलस नाहीं’ (कौतुक प्रसंग) तथा राम कलेवा में हास्य-व्यंग्य वार्ताएँ हैं। संस्कृत कवियों कालिदास, शूद्रक, भवभूति ने विदूषक के ज़रिए व्यंग्य-विनोद का कुशल संयोजन किया है, "दामाद दसवाँ ग्रह है, जो सदा वक्र व क्रूर रहता है। जो सदा पूजा जाता है और सदा कन्या राशि पर स्थित है।"
लोक-जीवन में तमाशेबाज़ी, बातपोशी, रसकथाओं, गालीबाज़ों, भांडों और बहुरुपियों ने हास्य-व्यंग्य वृत्तांत वर्णित किए हैं। विवाह और होली पर्व पर हमारा विनोदी स्वभाव उभर आता है। अतः दीगर यह कि विश्व में हास्य-व्यंग्य के पुरोधा हम ही हैं।
अस्तु, इस व्यंग्य-संग्रह को विषय एवं शैली-वैविध्य के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास है। इसमें व्यंग्य- कथा, निबंध, गोष्ठी, प्रश्नोत्तरी, प्रेस कॉन्फ्रेंस, संवाद, साक्षात्कार, सर्वे आदि शिल्पों की चौंतीस व्यंग्य रचनाएँ संकलित की गई हैं।

Prabha Shanker Upadhayaye

प्रभा शंकर उपाध्याय 'प्रभा'
जन्म : 1 सितम्बर, 1954 गंगापुर सिटी (राज०)
शिक्षा : विज्ञान विषय से स्नातक । हिन्दी में एम०ए० । पत्रकारिता में स्नातकोत्तर उपाधि पत्र। 
आजीविका : स्टेट बैक ऑफ़ बीकानेर एण्ड जयपुर में अधिकारी के पद पर कार्यरत ।
साहित्य-परिचय : विद्यार्थी काल से लेखन । तत्पश्चात कुछ वर्ष स्वतंत्र पत्रकारिता एवं साहित्य की विविध विधाओं में लेखन ।  दैनिक प्रजाजन के न्यूज ब्यूरो प्रमुख के पद पर कार्य । सरकारी सेवा में आने के पश्चात् मुख्यत: व्यंग्य विधा में ही लेखन । धर्मयुग, कादम्बिनी, सारिका, नवनीत मनोरमा, साप्ताहिक हिन्दुस्तान, नवभारत टाइम्स, जनसत्ता, दैनिक हिन्दुस्तान, पंजाब केसरी आदि में लगभग तीन सौ रचनाएँ प्रकाशित तथा आकाशवाणी से प्रसारित
उपलब्धियाँ/पुरस्कार/सम्मान : कादम्बिनी द्वारा आयोजित व्यंग्य कथा प्रतियोगिता : 1992 का पुरस्कार ।  वर्ष 1984 से 1994 के दशक में लिखी श्रेष्ठ हास्य-व्यंग्य कहानियाँ के अंतर्गत 'शोध- दिशा' के अध्ययन में रचना का चुनाव तथा संकलन में स्थान प्राप्न।  जवाहर कला केंद्र, राजस्थान द्वारा लघु नाट्य प्रतियोगिता में एक हास्य नाटक पुरस्कृत । राजस्थान लोक कला मंडल, बाड़मेर भारतीय युवा सेवा मंडल. करौली तथा स्व० रामचरण पाराशर शिक्षा समिनि  द्वारा अलग-अलग आयोजित प्तम्मान समारोह में प्राशस्ति पत्र प्राप्त ।

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