Sannate Se Muthbher

Ganga Prasad Vimal

Availability: In stock

Seller: KGPBOOKS

Qty:
60.00 54 + Free Shipping


  • Year: 1994

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170162087

'सन्नाटे से मुठभेड़' में गंगाप्रसाद विमल की नई कविताएँ संकलित हैं।
इन कविताओं में समकालीन कविताओं से जो भिन्नता है , उसे रेखांकित करना आसान है । समकालीन कविताओं की एक धारा में पूर्ववर्ती परम्परा का अनुगमन है तो दूसरी धारा में कथन का चमत्कार । इन दोनों धाराओं में ‘भाषा के नये गणित की वह विरल उपस्थिति नहीं है जो सहजता के गुण से अलंकृत 'सन्नाटे से मुठभेड़' में है ।
केवल शब्दों के संयोजन में कविता पाना आसान नहीं है । अर्थों के सुनियोजित क्रम में भी उसका अनुभावन दुष्कर है । एक सही काव्य विवेक अर्थों के भीतर उपजाने वाले प्रतिसंसार की प्रतीति में है । बाहर की चिंताओं से उपजने वाले त्रास या प्रताड़ में मामूली किस्म का वास्तव अंकित होता है । बीसवीं शताब्दी के हाहाकार को उन विमानवीय स्वरों में ही पहचाना जा सकता है जिसके लिए समकालीन कविताएँ  वास्तविकता की अदेखी धुरियों को अनावृत करने में लगी हैं । बल्कि कहना होगा, अर्थवान कविताएँ अपने समकाल से इसी मायने में विग्रहरत्त है कि वे आद्य जिज्ञासाओं से लेकर वर्तमान की अन्तर्धाराओँ में हस्तक्षेप करती है ।

Ganga Prasad Vimal

गंगाप्रसाद विमल हिमालय के एक छोटे-से कस्बे में, 1939 में जन्मे गंगाप्रसाद विमल ने अनेक विश्वविद्यालयों में शिक्षा पाई । एक-चौथाई शताब्दी अध्यापन करने के बाद वे 1989 में भारत सरकार के केंद्रीय हिंदी निदेशालय के निदेशक नियुक्त किए गए । साथ ही साथ उन्होंने सिंधी भाषा की राष्ट्रीय परिषद और उर्दू भाषा की राष्ट्रीय परिषदों का काम भी संभाला । विश्व की अनेक भाषाओं में उनकी कहानियों के अनुवाद प्रकाशित हुए हैं । 'न्यूडायमेंशंस', 'मेडिटिरेनियन रिव्यू', 'वैस्टर्न ह्यूमेनिटीज रिव्यू', 'द न्यू रेनेंया', 'क्वैरी', ‘प्रिन्य इंटरनेशनल', 'इस्टर्न होराइ्जन' आदि विश्वप्रसिद्ध पत्रिकाओं में उनकी कहानियों का प्रकाशन हुआ है । लंदन के फॉरेस्ट बुक्स ने उनकी कविताओं और कहानियों का एक बृहद संकलन कुछ वर्ष पहले प्रकाशित किया था । अब तक हिंदी में उनके ग्यारह कहानी-संग्रह प्रकाशित हुए हैं । इसके साथ ही चार उपन्यास तथा सात कविता-संग्रह व विश्व की अनेक कृतियों की उनके द्वारा अनुदीत पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं । हाल ही से उनके उपन्यास 'मृगान्तक' पर एक अंतर्राष्ट्रीय फिल्म "बोक्षु : द मिथ' का निर्माण हुआ है, जिसका प्रदर्शन अंतर्राष्टीय फिल्म महोत्सव में किया गया। अनेक राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत गंगाप्रसाद विमल जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर-पद से सेवामुक्त होकर लेखन में सक्रिय है ।

Scroll