Rassakashi

Nisha Bhargva

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  • Year: 2017

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Parmeshwari Prakashan

  • ISBN No: 978-93-80048-67-3

निशा भार्गव हिन्दी की उल्लेखनीय हास्य व्यंग्य कवयित्रियों में अपना मुकाम रखती हैं। कुछ ही कवयित्रियां है जो मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर हास्य व्यंग्य की सृष्टि करती हैं। मेरा मानना है कि उन्होंने काव्य मंचों के माध्यम से और दूरदर्शन, आकाशवाणी में अपने काव्य पाठ से असंख्य श्रोताओं को आनंदित, उल्लसित किया है। इधर उनका नया काव्य संकलन 'रस्साकशी’ के शीर्षक से प्रकाशित हो रहा है जिसमें उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज और गहन गम्भीर शैली में आज के जीवन में व्याप्त विसंगतियों द्वंद्व को रेखांकित किया है।  जीवन में न्याय और अन्याय के बिच, सत्य और असत्य के बीच सकारात्मकता और नकारात्मकता के बीच जो द्वंद्व चल रहा है उसके बीच रस्साकशी जैसा माहौल बना हुआ है । रस्साकशी के इस माहोल में उत्पन्न तनाव से बचते हुए निशा भार्गव ने सरस, सारगर्भित और जनप्रिय रचनाएं लिखने का उद्यम जिया है उनके इस प्रयास से सदैव सकारात्मक प्रवृतियों की विजय के संकेत मिलते हैं। कविता का उद्देश्य भी लगभग यही है। तमाम निराशाओं-दुराशाओं के बीच आशा की किरण खोज लेना कवि कर्म का सबसे बडा उद्देश्य माना गया है । निशा भार्गव अपने इस प्रयत्न में पूर्णत: सफल हैं। उनमें एक संवेदनशील मन को सकारात्मक भाव से पेश करने का जज्बा हर कोण से दिखाई देता है। मैं उनक लेखन की सफ़लता की कानना करता हू ।

Nisha Bhargva

अजमेर (राजस्थान) में पली बढी निशा भार्गव ने अर्थशास्त्र में एस.ए. किया । राजस्थान विश्वविद्यालय से स्वर्णपदक जीत कर अपने विद्यालय व महाविद्यालय की सर्वश्रेष्ठ छात्रा कहलाने का गौरव प्राप्त किया । अपने महाविद्यालय से स्वर्ण एवं रजतपदक प्राप्त किये तथा आठ वर्षों तक राष्ट्रीय छात्रवृत्ति प्राप्त की ।
भूतपूर्व प्राध्यापिका एवं सदैव प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने वाली निशा भार्गव ने अनेक पुरस्कार प्राप्त किए। विविध मंचों पर काव्यपाठ के साथ-साथ निशा भार्गव ने 1996 में राष्ट्रपति पवन में भी काव्यपाठ किया तथा भारत की प्रथम महिला श्रीमती विमला रगर्मा द्वारा सम्मानित हुई ।
'अनकहे पल' आपका सम्मिलित काव्य संग्रह है । 'उधार की मुस्कान' (2000), 'अच्छे फंसे' ( 2003) , 'चिकने घडे' (2006), 'बंटाधार' (2010) , 'घनचक्कर' (2012) हास्य व्यंग्य काव्य संग्रह हैं । 'तिनके-तिनके' (लघु कथा संग्रह) 2012 तथा 'बसंत बयार' 2012 (कहानी संग्रह) प्रस्तुत है। 
कल्पतरु संस्था दिल्ली द्वारा 1999 में 'कविता विदुषी' पुरस्कार मक्खनलाल शांतिदेवी ट्रस्ट द्वारा 2002 में हास्य-व्यंग्य लेखन हेतु सम्मानित , भारतीय साहित्यकार संसद बिहार द्वारा 2005 में 'हरिशंकर परसाई राष्ट्रीय शिखर साहित्य सम्मान', अखिल भारतीय राष्ट्रभाषा विकास संगठन एवं यू.एस.एम. पत्रिका गाजियाबाद द्वारा 2006 में सुभद्रा कुमारी चौहान स्मृति सम्मान, महिला मंगल संस्था दिल्ली द्वारा 'साहित्य प्रतिभा सामान' 2006, भारतीय साहित्यकार संसद बिहार द्वारा 2007 में काका हाथरसी साहित्य सम्मान, कवितायन संस्था द्वारा 'साहित्य सृजन सम्मान' 2011 प्राप्त हुए।
आकाशवाणी व दूरदर्शन के विविध कार्यक्रमों से लगातार जुडाव । कविता, कहानी, वार्ता, समीक्षा तथा साक्षात्कार का प्रसारण । टेलीविजन के 'वाह-वाह" कार्यक्रम (SAB), 'अर्ज किया है' (NDTV), "उठो जागो’ (प्रज्ञा टीवी) तथा दूरदर्शन की काव्यगोष्टियो में काव्य पाठ करने का अवसर मिला

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