Mukti-Dwar Ke Saamne

Pratap Sehgal

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  • Year: 2012

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Amarsatya Prakashan

  • ISBN No: 9788188466979

‘मुक्ति-द्वार के सामने’ की कविताएं लगभग पिछले पंद्रह वर्षों में लिखी गई कविताएं हैं। मुक्ति-द्वार शब्द हमारी मनीषा के उन संस्कारों से जुड़ा हुआ है जो धर्म के साथ संपृक्त हैं। और अध्यात्म की व्याख्या भी अकसर धर्म से जोड़कर ही की जाती है। लेकिन इन कविताओं का संसार उस धर्मिक कर्मकांडी संस्कारों से दूर-दूर तक नहीं जुड़ता। इन कविताओं का अध्यात्म छायावादी अध्यात्म भी नहीं बल्कि इस दुनिया के गोचर से जुड़ा हुआ अध्यात्म है। अगोचर के प्रति अनावश्यक रूप से संलग्न रहकर समय व्यर्थ करने में प्रताप सहगल विश्वास नहीं करते। उनका विश्वास बच्चे, फूल, नदी और उन तमाम चीजों में है जो गोचर होते हुए भी एक विस्मय-जगत् की रचना करते हैं। ये कविताएं वस्तुतः उसी विस्मय- जगत् में प्रवेश करती हैं। एक नितांत निजी अनुभव को प्रताप कविता का मूल मानते हैं और उस निजी अनुभव के सामाजिक विस्तार को कविता का श्रेय। कुछ कविताओं में राजनीतिक, सामाजिक संदर्भ और आशय भी साफ नजर आते हैं। उन संदर्भों के सहारे ही कवि अपने आशय स्पष्ट करता है और इन आशयों में भी उन संदर्भों के पीछे छिपी अमानवीयता से भी वह मुक्ति की कामना करता चलता है।

Pratap Sehgal

प्रताप सहगल
जन्म : 10 मई, 1945
प्रकाशित रचनाएँ :- कविता-संग्रह : 'सवाल अब भी मौजूद है', 'आदिम आग', 'अँधेरे में देखना', 'इस तरह से', 'नचिकेतास ओडिसी', 'छवियाँ और छवियाँ', मुक्तिद्वार के सामने  ० नाटक : 'अन्वेषक', 'रंग बसंती', 'नहीं कोई अंत', 'मौत क्यों रात- भर नहीं आती', 'चार रूपांत',  'नौ लघु नाटक',  'पाँच रंग नाटक', 'अपनी-अपनी भूमिका', 
'कोई और रास्ता तथा अन्य लघु नाटक है', 'कोई और रास्ता', 'मेरे श्रेष्ठ लघु नाटक', 'अंधेरे में' (पीटर शेफर के नाटक ब्लैक कॉमेडी का रूपांतर), 'किस्सा तीन गुलाबों का' (बल्गेरियन नाटक का अनुवाद), 'छू मंतर' (बाल नाटक), 'दस बाल नाटक', 'दो बाल नाटक' ०  उपन्यास : 'अनहद नाद', 'प्रियकांत' ० कहानी-संग्रह : 'अब तक', 'मछली-मछली  कितना पानी' ० आलोचना : 'समय के सवाल', 'रंग चिंतन', 'समय के निशान', ० विविध : 'अंशतः' (चुनिंदा रचनाओं का संग्रह)
सम्मान एवं पुरस्कार : साहित्यकार सम्मान, हिंदी अकादमी, दिल्ली ० सौहार्द सम्मान, उत्तरप्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ ० मैथिलीशरण गुप्त पुरस्कार ० 'रंग बसंती' पर साहित्य कला परिषद द्वारा सर्वश्रेष्ठ नाट्यालेख पुरस्कार ० 'अपनी-अपनी भूमिका' शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पुरस्कृत  ० 'आदिम आग' व 'अनहद नाद' हिंदी अकादमी, दिल्ली द्वारा पुरस्कृत ० राजभाषा सम्मान, भारत सरकार एवं हिंदीसेवी राजभाषा सम्मान रोटरी क्लब, दिल्ली

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