Janhit Tatha Anya Kavitayen

Hiralal Bachhotia

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  • Year: 2002

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Arya Prakashan Mandal

  • ISBN No: 9788188118014

जनहित तथा अन्य कविताएँ
हीरालाल बाछोतिया की कविताओं में आज के मनुष्य की जिजीविषा, करुणा एवं मनस्ताप अभिव्यक्त हुआ है । कविताओं में एक ताजगी है, अन्य समकालीनों से अलगाव, जिसे है कवि का एक आवश्यक गुण मानता है । अपने परिवेश, अपनी धरती और अपनी आंतरिक अन्विति इन कविताओं में सजीव रूप में ध्वनित हुई है ।
इस संग्रह की कविताएँ चार खंडों में विभाजित हैं । इन चारों खंडों में वैविध्य भी है और एक आंतरिक सामंजस्य भी । जो विशेष बात इन तमाम कविताओं में दिखाई दी, वह है मनुष्य के संताप को दूर करने के लिए कविता के द्वारा अक्रिय प्रयास । इसे मैं मानव-मुक्ति को कविता कह सकता हूँ ।
इस संग्रह में कहीं-कहीं प्रकृति के अछूते बिंब है और ऐसा लगता है कि महानगर के विषाक्त वातावरण में रहकर भी कवि अपने अतीत को और अपने आत्मीय क्षणों को भूल नहीं पाया है । किंतु यह अतीतजीवी होना नहीं, नित नवीन की और अग्रसर होते हुए अपनी स्मृतियों को भी सहेजकर रखने जैसा है ।
हिंदी पाठकों को ये कविताएँ आकृष्ट भी करेंगी और एक नई काव्य-संवेदना से भी उनका साक्षात्कार होगा ।

Hiralal Bachhotia

हीरालाल बाछोतिया
प्रकाशित कृतियाँ :- अभी भी, जनहित और अन्य कविताएं, (कविता); विद्रोहिणी शबरी (मिथक काव्य); एक और मीनाक्षी, कस्तूरी गंध, नेकी की राह, आँगन का पेड़, फल हमारा है (उपन्यास); नहीं रुकती है नदी, भारत से बाहर भारत (यात्रा-यायावरी); हिंदी शिक्षण : संकल्पना और प्रयोग, राजभाषा हिंदी और उसका विकास, प्रौढ शिक्षा : संकल्पना और प्रयोग, हिदीं भाषा : प्रकृति, प्रयोग और शिक्षण (भाषा; भाषिकी); निराला साहित्य का अनुशीलन, आकाशधर्मी आचार्य : पं. हजारीप्रसाद द्विवेदी (प्र. हिंदी अकादमी, दिल्ली); हिंदी की अन्य गद्य विधाएँ (प्र. हिंदी अकादमी, दिल्ली), सतपुडा के स्वर, अस्मिता (काव्य-संकलन), अनुस्वा (साहित्यिक त्रैमासिकी) (संपादन) ।

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