Is Bar Sapne Mein Tatha Anya Kavitayen

Parmanand Shrivastva

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  • Year: 2009

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Amarsatya Prakashan

  • ISBN No: 9788188466658

इस बार सपने में तथा अन्य कविताएँ
‘इस बार सपने में तथा अन्य कविताएँ’ परमानंद श्रीवास्तव की काव्ययात्रा से एक ऐसा चयन है, जिसे अपने दर्पण-समय का साक्ष्य कहा जा सके। ‘उजली हँसी के छोर पर’, ‘अगली शताब्दी के बारे में’, ‘चौथा शब्द’ और ‘एक अ-नायक का वृत्तांत’ से मुख्यतः चुनी कविताएँ अनामिका के संपादन में एक समय-संवाद बनाती हैं। प्रेम भी प्रतिरोध के विमर्श में शामिल है। ‘चित्र में स्त्रियाँ’, ‘छिपने की जगह’ जैसी कविताएँ एक नया मुहावरा हासिल करती हैं। परमानंद श्रीवास्तव के लिए कविता एक अकेली दुनिया का हालचाल, जिसे बताना मुश्किल है, तो छिपाना लगभग असंभव। ‘आसिया बानो’, ‘भानु मजूमदार’ जैसे नाम काल्पनिक भी हों तो आत्मा की भीतरी सृष्टि हैं। 
‘इस बार सपने में तथा अन्य कविताएँ’ स्त्री-उत्पीड़न और साम्प्रदायिक बर्बरता का आख्यान हैं, जिसे कविता अनोखे संवाद-शिल्प में अंकित करती हैं। कविता जैसे एक पटकथा हो, एक लैंडस्केप, एक विस्थापित की डायरी, एक समय-गाथा। ‘एलिना के लिए’ जैसी कविताएँ गहरे भेद खोलने वाली कविताएँ हैं। यहाँ भीतर का त्रासद तनाव प्रकट है तो कोमल मूक अन्तर्ध्वनि भी।
विस्थापन इन कविताओं का केन्द्रीय सच है। निर्वासन में कवि का आत्मनिर्वासन भी शामिल है।

Parmanand Shrivastva

परमानंद श्रीवास्तव
10 फरवरी, 1935; बाँसगाँव (गोरखपुर) में जन्म। लंबे समय तक सेंट एंड्रयूज कॉलेज में अध्यापन। 1995 में प्रेमचंद पीठ के प्रोफेसर के रूप में अवकाश प्राप्त 
प्रकाशित कृतियाँ :-
कविता: उजली हँसी के छोर पर, अगली शताब्दी के बारे में, चौथा शब्द, एक अनायक का वृत्तांत, इस बार सपने में तथा अन्य कविताएँ (चयन: अनामिका), प्रतिनिधि कविताएँ (चयन: अरुण कमल)। कहानी: रुका हुआ समय। डायरी: एक विस्थापित की डायरी। साक्षात्कार: मेरे साक्षात्कार। आलोचना: कवि कर्म और काव्य भाषा, शब्द और मनुष्य, कविता का अर्थात, दूसरा सौंदर्यशास्त्र क्यों, कविता का उत्तर-जीवन, उपन्यास का पुनर्जन्म, उपन्यास का यथार्थ और रचनात्मक भाषा, अँधेरे समय में शब्द, प्रतिरोध की संस्कृति और साहित्य, उत्तर समय में साहित्य, उत्तर औपनिवेशिक समय में साहित्य, कहानी की रचना-प्रक्रिया, उपन्यास के विरुद्ध उपन्यास, जैनेन्द्र के उपन्यास, आलोचना का स्वराज, अतल में अंतरीप
सम्मान: साहित्य भूषण सम्मान, द्विजदेव सम्मान, गद्य विध सम्मान (हिंदी अकादमी, दिल्ली); व्यास सम्मान (के.के.बिड़ला फाउंडेशन, नई दिल्ली); भारत भारती सम्मान (उ.प्र. हिंदी संस्थान, लखनऊ)
संपर्क: बी-70, आवास विकास कॉलोनी, सूरजकुंड, गोरखपुर-273015

स्मृति शेष: 5 नवंबर,  2013

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