Gehoon Ghar Aaya Hai

Divik Ramesh

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  • Year: 2009

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788190820455

गेहूँ घर आया है
‘रास्ते के बीच’ से चर्चित हो जाने वाले आज के सुप्रतिष्ठित हिंदी कवि दिविक रमेश बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। 38 वर्ष की आयु में ही ‘रास्ते के बीच’ और ‘खुली आँखों में आकाश’ कविता-संग्रहों पर सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड जैसा प्रतिष्ठित पुरस्कार मिलना उनकी कविताओं की महत्ता को रेखांकित करता है। उनकी अब तक की कविता-यात्रा को इस संग्रह में हिंदी के लब्धप्रतिष्ठ वरिष्ठ कवि एवं आलोचक अशोक वाजपेयी ने अपनी रुचि के अनुसार चुनिंदा ढंग से प्रस्तुत किया है। निःसंदेह इससे पाठकों का एक बड़ा हित सधेगा।
युवा कवि हेमंत कुकरेती की धारणा है कि दिविक रमेश की "कविताओं में हम जिंदगी से प्यार करने वाले मन को महसूस कर सकते हैं। वह सुख-दुःख से रची ज़िंदगी में डूबकर ही जीवन का वास्तविक अर्थ हासिल करता है। इसीलिए उसका संबोधन सीधे पृथ्वी, काल, हवा, रात, धूप और अंततः जीवन से है। आसानी से समझ में आने वाली ये कविताएँ किताबी अनुभववाद का भाषानुवाद नहीं हैं। सरलीकरण से बचते हुए दिविक रमेश जीवन की जटिलताओं को आसानी से कह देते हैं और उनका इतना सहज और स्वाभाविक होकर कहने में सफल होना कई बार हैरत में डालता है...।" (‘इंडिया टुडे’, 10 जनवरी, 2001)
और ‘छोटा-सा हस्तक्षेप’ की कविताओं पर बोलते हुए प्रोफेसर नामवर सिंह ने कहा--इस संग्रह को पढ़कर उन्हें प्रीतिकर आश्चर्य हुआ। कवि दिविक रमेश ने बहुत लंबी छलाँग लगा दी है। कविताओं में कई तरह की आवाजें हैं। जो कविताएँ लिखी जा रही हैं, ये कविताएँ उनसे हटकर हैं। दिविक रमेश ने कविता की एक नई आवाज़ विकसित कर दी है। अशोक वाजपेयी और विष्णु खरे जैसे रचनाकारों ने इन कविताओं को सराहा है। ‘यात्रांत’ एक अद्भुत कविता है। रूस पर बहुत कुछ लिखा गया है, लेकिन रूस के अनुभव पर लिखी गई कविता बहुत ही बारीक है। हिंदी में पहली बार ऐसी कविता संभव हुई है। हिंदी में ‘भूत’ जैसी कविता नहीं है। फैंटेसी की बहुत बात की जाती है, लेकिन फैंटेसी यहाँ देखिए। यह एकमात्रा ऐसा संग्रह है, जिसमें एक साथ दर्जन से ऊपर उत्कृष्ट कविताएँ हैं।   

Divik Ramesh

दिविक रमेश

जन्म: गाँव किराड़ी (दिल्ली), 1946
प्रमुख प्रकाशित रचनाएँ: कविता-संग्रह: ‘रास्ते के बीच’, ‘खुली आँखों में आकाश’, ‘हल्दी-चावल और अन्य कविताएँ’, ‘छोटा-सा हस्तक्षेप’, ‘फूल तब भी खिला होता’, ‘गेहूँ घर आया है’, ‘फेदर’ (अंग्रेजी में अनूदित) ०  काव्य-नाटक: ‘खंड-खंड अग्नि’ ०  आलोचना-शोध: ‘नए कवियों के काव्य-शिल्प सिद्धांत’, ‘कविता के बीच से’, ‘साक्षात् त्रिलोचन’, ‘संवाद भी विवाद भी’ ०  बाल-साहित्य: बारह कविता-संग्रह  ०  आठ कहानी-संग्रह  ०   लोककथाओं की तीन पुस्तकें  ०   संस्मरण: ‘फूल भी फल भी’  ०   बाल-नाटक: ‘बल्लू हाथी का बाल घर’  ०   संपादित: ‘निषेध के बाद’ (कविता), ‘हिंदी कहानी का समकालीन परिवेश’ आदि  ०   अनूदित: ‘कोरियाई कविता- यात्रा’, ‘सुनो अफ्रीका’ आदि।
प्रमुख पुरस्कार-सम्मान: सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड, गिरिजा- कुमार माथुर पुरस्कार, हिंदी अकादमी, दिल्ली का साहित्यकार सम्मान, गौरव सम्मान (पोर्ट  ऑव स्पेन), एन.सी.ई. आर.टी. का राष्ट्रीय बाल-साहित्य पुरस्कार, हिंदी अकादमी का साहित्य कृति एवं बाल-साहित्य कृति पुरस्कार, इंडो- रशियन लिटरेरी क्लब सम्मान, भारतीय बाल-कल्याण संस्थान, कानपुर का सम्मान, कोरियाई दूतावास से प्रशंसा-पत्र, बंग नागरी प्रचारिणी सभा का पत्राकार शिरोमणि सम्मान, प्रकाशवीर शास्त्री विशिष्ट सम्मान, क्रियेटिव जायंट--2007, 
द होम ऑव लैट्रस (इंडिया) उड़ीसा।

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