Baat Meri Kavita

Trilochan

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  • Year: 2009

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9789380146102

बात मेरी कविता
त्रिलोचन भले बोलते न दिख रहे हों, उनकी कविता बोल रही है और बोलती रहेगी--इसमें कोई संदेह नहीं हो सकता।
ऐसे सैकड़ों शब्द हैं, जिनका आधुनिक कविता में प्रयोग त्रिलोचन के अलावा किसी ने नहीं किया। हिंदी कविता इसलिए भी उनके प्रति हमेशा कृतज्ञ रहेगी कि एक ऐसे युग में, जिसमें कविता की शब्द-संपदा लगातार घटती गई है, वह उन बिरलों में से थे, जो इस संपदा में कुछ नया बराबर जोड़ते रहे और इस तरह हिंदी की प्राणधारा को पूर्णतया बनाए रखने की चेष्टा की।
यह निरी भाषिक विविधता का मामला नहीं है। यह विविधता आती ही है जीवन की उस सहज विपुलता से, जिसके त्रिलोचन एक लगभग ज़िद्दी कवि हैं।
--अशोक वाजपेयी
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त्रिलोचन की कविता में आवेगों की रास तनी रहती है। वह उसे उन्मुक्त नहीं छोड़ते। कविता का स्वर सधा हुआ है। पिच बहुत ऊपर-नीचे नहीं जाता। रोमैंटिक कविता से बने पाठकीय संस्कार के साथ त्रिलोचन की कविता के करीब आना इसलिए कई बार बहुत कठिन होता है। उसे पढ़ने के लिए एक अभ्यास और कविता का एक अलग संस्कार चाहिए। उसमें एक क्लासिकीय काव्य-संयम है। --राजेश जोशी

Trilochan

नाम: त्रिलोचन (शास्त्री--उपाधि)
मूल नाम: वासुदेव सिंह
जन्म: 20 अगस्त, 1917, चिरानीपट्टी, कटघरापट्टी, सुल्तानपुर (उ० प्र०)
शिक्षा: बी० ए०, एम० ए० (पूर्वार्द्ध) अंग्रेजी साहित्य
अनुभव: खेती-किसानी, कवि, कोशकार, शिक्षक, पत्रकार व लेखक।
प्रकाशित कृतियाँ: ‘धरती’ (1945), ‘गुलाब और बुलबुल’ (ग़ज़लें और रुबाइयाँ--1956), ‘दिगंत’ (सॉनेट--1957), ‘ताप के ताए हुए दिन’ (1980, साहित्य अकादेमी पुरस्कार--1982), ‘शब्द’ (1980), ‘उस जनपद का कवि हूँ’ (1981), ‘अरघान’ (1983), ‘अनकहनी भी कुछ कहनी है’ (1985), ‘तुम्हें सौंपता हूँ’ (1985), ‘फूल नाम है एक’ (1985), ‘प्रतिनिधि कविताएँ: त्रिलोचन’, संपादक--केदारनाथ सिंह (1985), ‘देशकाल’ (कहानी- संग्रह--1986), ‘चैती’ (1987), ‘सबका अपना आकाश’ (1987), ‘अमोला’ (अवधी भाषा में रचे बरवै--1990), ‘रोजनामचा’ (डायरी--1993), ‘काव्य और अर्थबोध’ (साहित्यिक निबंध--1995), ‘मेरा घर’ (2002), ‘जीने की कला’ (2004)
सम्मान: उ० प्र०  हिंदी संस्थान से ‘दिगंत’ व ‘गुलाब और बुलबुल’ (ग़ज़लें और रुबाइयाँ--1958), साहित्य पुरस्कार (1983), महात्मा गांधी पुरस्कार (2005), म० प्र०  से मैथिलीशरण गुप्त सम्मान (1990), दिल्ली की हिंदी अकादमी से शलाका सम्मान (1992), म० प्र०  हिंदी साहित्य परिषद से भवानीप्रसाद मिश्र राष्ट्रीय पुरस्कार (‘फूल नाम है एक’ कविता-संग्रह--1993-94), सुलभ साहित्य अकादमी पुरस्कार (1999), भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता सम्मान (2005)
स्मृति-शेष: 9 दिसंबर, 2007

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