Ab Bhi Ashesh

Om Bharti

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  • Year: 2011

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9789381467329

अब भी अशेष
जाने-माने वरिष्ट कवि ओम भारती का यह पाँचवाँ कविता-संग्रह है । आठवें दशक से ही या कवि अपनी पृथक पहचान के लिए सजग रहा है । इस किताब में उसकी रचनात्मकता का बढ़ा हुआ क्षेतिज़ फलक ही नहीं, ऊर्ध्व विस्तार भी सुस्पष्ट है । यह संग्रह दर संग्रह उत्कृर्ष का कवि हैं, हर नयी प्रस्तुति से 'परफेक्शन' की और दृढ़ता से बढ़ता हुआ कवि ।
ओम भारती जितना हिंदी की जातीय काव्यसरणी में हैं, उतना ही उससे बाहर भी । आधुनिकता एवं विखंडन को नयी अर्थवत्ता देने में वे भावुकता का निषेध करते हैं । यह उस तरह की कविता है, जो अपने अंतिम निष्कर्ष में सारे जीवन को ही कविता के रूप से लेती हैं । इसमें कवि स्वयं ही अपना अन्यीकरण करता चलता है ।
आज देशकाल में जो अनर्गल, अवांछनीय और अनय चल रहा है, यहाँ उसका सक्षम संयमित प्रतिरोध है । चीजों की एक भली-सी अनायासता है । यूँ भी ओम भारती अपनी कविता के लिए समकालीनों से भिन्न तथा नवीन वस्तु चुनते रहे हैं । 'द्वार घंटी का बटन’, 'थाली', 'रहचूँ झूला', "झाड़फानूस थे वे', 'जूते' इत्यादि कविताएं, जो इस जिल्द में बंधी हैं, पाठकों को इधर की कविता के एक उत्सुक और उत्तरदायी रकबे में ले जाएंगी ।
'अब भी अशेष' संकलन जीवन-द्रव्य से पुष्ट कविताई लिए है । जीवन-जगत् की छोटी-बड़ी चीजों में, उनकी साधारणता से भी ओम भारती अतिरिक्त एवं बड़ा अर्थ भरते रहे हैं । यह काम वे निजी और नये भाषायी रजिस्टर में करते हैं । हर अगली लिखत में वे जैसे स्वयं को भी नया करते चलते है । पुस्तक की शीर्षक-कविता काव्य-पाठ पर एक दिलचस्प वृष्टि है, जो कविता के संप्रेषित होने पर एक ईमानदार संदेह करती है ।
पाठक इन रचनाओं से एक गीताभा लक्षित करेंगे, छंदाभास  देखेंगे, जो आज की कविता को शिष्ट प्राण और विशिष्ट रंग से भर देता है । कवि रूमानिया को झटक देता है, एक 'लिरिकल’ धोखे को झटका देता है । 'सांसत घर' छोटी-सी कविता है, जिसमें एक 'सिम्फनी' तत्सम शब्दों की है, एक तदभव पदों की, एक उदात्त विचारों की, ना एक लहुलुहान शब्दों के होने की सिम्फनी भी है । मानों चार तारों पर लरजता स्वर-संगम है । 'बारिश' में जैसे एक 'सिंनेमैटिक ग्लो’ है  ।

Om Bharti

ओम भारती
कवि, कथाकार, आलोचक 
जन्म : 1 जुलाई, 1948 को इटारसी (म०प्र०) के एक प्रतिष्ठित साहित्यिक परिवार से ।
शिक्षा : इटारसी, सागर एवं जबलपुर में । मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बी०ई० ओनर्स । स्वाध्यायी रूप से संस्कृत में 'विशारद' ।
प्रकाशित कृतियाँ :-
कहानी-संग्रह : 'एक पल का रंज' (1981)
कविता-संग्रह : 'कविता की आँख" (1989), 'इस तरह गाती है जुलाई' (1993), 'जोखिम से कम नहीं' (1999), 'वह छठवाँ तत्व' (2004)
लंबी कविता : 'कोरी उम्मीद नहीं' (1995)
म०प्र० साहित्य अकादमी का माखनलाल चतुर्वेदी कविता पुरस्कार; म०प्र० हिंदी साहित्य सम्मेलन का वागीश्वरी पुरस्कार ।
पल-प्रतिपल का ज्ञानरंजन विशेषांक, दशकारंभ का कविता-विशेषांक, साहित्य स्पर्श का कविता-अंक, 'आकंठ' का समकालीन कविता : छत्तीसगढ़ एवं कुछ और लघु पत्रिकाओं के विशेष अंकों का अतिथि संपादन ।

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