Bharat Ke Pramukh Sahityakaron Se Antrang Baatcheet

Ranvir Rangra

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  • Year: 2010

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Arya Prakashan Mandal

  • ISBN No: 9788189982126

भारत के प्रमुख साहित्यकारों से अन्तरंग बातचीत
किताबघर प्रकाशन श्रेष्ठ भारतीय साहित्य के आदान-प्रदान से भी सक्रिय रहा है । भारतीयता और भारतीय साहित्य की अंतर्धारा को समझने के लिए यह अनिवार्य है कि हम अपनी भाषा की सीमारेखाओं से बाहर भी झाँकें । प्रमुख भारतीय साहित्यकारों को एक मंच पर लाने की दिशा में हमारा पहला अभिनव प्रयोग था 'भारतीय लेखिकाओं से साक्षात्कार' । प्रस्तुत प्रकाशन उसी की अगली कड़ी है जिससे भारत के पच्चीस साहित्यकारों से इस विधा के विशेषज्ञ डॉ० रणवीर रांग्रा की अन्तरंग बातचीत सम्मितित है, जिसके माध्यम से अनेक ऐसे रचना-रहस्य प्रकाश में आए हैं जिनसे अब तक हिंदी-जगत ही नहीं, भारतीय साहित्य-समाज भी अनभिज्ञ था ।
इस प्रकार, यह पुस्तक मात्र एक और प्रकाशन नहीं, बल्कि एक दस्तावेज से जिसका उपयोग भारतीय साहित्य के संदर्भ-ग्रंथ के रूप में भी किया जा सकता है । आशा हैं, इससे प्रबुद्ध पाठको की अनेक जिज्ञासाओं का समाधान हो सकेगा और उन्हें एक ऐसी अंतर्दूष्टि प्राप्त होगी जिससे समकालीन भारतीय साहित्य की आत्मा तक पहुंचने में सहायता मिलेगी ।

Ranvir Rangra

डॉ० रणवीर रांग्रा
जन्म : 18 अप्रैल, 1924 गाँव हरियाणा, जिला होशियारपुर (पंजाब) । 
शिक्षा : एम०ए०, पी०एच०डी०, आगरा विश्वविद्यालय ।
प्रमुख कृतियों : हिंदी-उपन्यास से चरित्र चित्रण का विकास ।
साहित्य : साधना और संघर्ष, समकालीन हिंदी-उपन्यास की भूमिका । हिंदी उपन्यास : अछूते संदर्भ : आस्वाद के आयाम, भारतीय साहित्यकारों से साक्षात्कार (सोलह भाषाओं के पचास साहित्यकारों से) ।
हिंदी-साहित्यकारों से साक्षात्कार ।
मनोवैज्ञानिक हिंदी उपन्यास की बृहत्रयी, इंटरव्यूज विद इंडियन-राइटर्ज (अंग्रेजी) लिम्का बुक ऑफ़  रिकॉंडर्ज- 2004 में विशेष उल्लेख (सर्वाधिक साहित्यिक साक्षात्कार) ।
मनीषियों के संग (संस्मरण), सत्यं शिवं सुंदरमं (लेख-संग्रह), भारतीय उपन्यास ।
कृतकार्य : पूर्व निदेशक, केंद्रीय हिंदी निदेशालय शिक्षा विभाग, मानव संसाधन मंत्रालय ।

स्मृति शेष : 2 अगस्त, 2007

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