Hindi Bhasha Prakriti, Prayog Aur Shikshan

Hiralal Bachhotia

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  • Year: 2012

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Arya Prakashan Mandal

  • ISBN No: 978-81-89982-46-1

भाषा वह है, जिसे हम बोलते हैं। वह हमें उत्तराधिकार में मिली चीज हैं। इसलिए हम उसकी कम परवाह करते हैं। उसकी प्रकृति और प्रकार्य जानने की कोशिश भी कम ही की जाती है। लेकिन हिंदी बोलने और सीखने की इच्छा रखने वालों की संख्या विभिन्न कारणों से निरंतर बढ़ भी रही है। दुनिया-भर में इसके बोलने/सीखने वाले बढ़ रहे हैं। वह दिन भी दूर नहीं, जब हिंदी संयुक्त राष्ट्र संघ की मान्यताप्राप्त भाषा होगी। अतः हिंदी की प्रयोग संबंधी बारीकी जानने की उत्सुकता बढ़ रही है। भाषा का मुख्य प्रयोजन संप्रेषण है। प्रभावशाली संप्रेषण के लिए भाषा के प्रायोगिक बिंदुओं, ध्वनिव्यवस्था आदि की जानकारी अपेक्षित है। वाक् (स्पीच) घटना (इवंेट) के रूप में घटित होती है। विचार या भाव शब्द का जामा पहने हैं। अतः ध्वनि या उच्चारण के ठीक रहने पर ही सही संप्रेषण घटित होता है। हिंदी भाषा की ध्वनि-व्यवस्था अत्यंत वैज्ञानिक है, जिसकी समझ सही उच्चारण में सहायक होती है। हिंदी की एक विशेषता यह भी है कि हम जैसा बोलते हैं, प्रायः वैसा ही लिखते हैं। अतः थोड़े से प्रयास से भाषा के सही प्रयोग पर अधिकार प्राप्त किया जा सकता है। शिक्षण द्वारा बच्चे भाषा-प्रयोग में महारत हासिल कर सकते हैं। पाठ-अध्यापन भाषा के हर तरह के प्रयोग को सीखने और अभ्यास करने का अवसर देते हैं। इसलिए भाषा की प्रकृति, प्रयोग और शिक्षण में अंतर्संबंध के परिप्रेक्ष्य में यह एक विनम्र प्रयास है।

Hiralal Bachhotia

हीरालाल बाछोतिया
प्रकाशित कृतियाँ :- अभी भी, जनहित और अन्य कविताएं, (कविता); विद्रोहिणी शबरी (मिथक काव्य); एक और मीनाक्षी, कस्तूरी गंध, नेकी की राह, आँगन का पेड़, फल हमारा है (उपन्यास); नहीं रुकती है नदी, भारत से बाहर भारत (यात्रा-यायावरी); हिंदी शिक्षण : संकल्पना और प्रयोग, राजभाषा हिंदी और उसका विकास, प्रौढ शिक्षा : संकल्पना और प्रयोग, हिदीं भाषा : प्रकृति, प्रयोग और शिक्षण (भाषा; भाषिकी); निराला साहित्य का अनुशीलन, आकाशधर्मी आचार्य : पं. हजारीप्रसाद द्विवेदी (प्र. हिंदी अकादमी, दिल्ली); हिंदी की अन्य गद्य विधाएँ (प्र. हिंदी अकादमी, दिल्ली), सतपुडा के स्वर, अस्मिता (काव्य-संकलन), अनुस्वा (साहित्यिक त्रैमासिकी) (संपादन) ।

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