Bhasha-Praudyogiki Evam Bhasha-Prabandhan

Prof. Surya Prasad Dixit

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  • Year: 2012

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170166696

भाषा-प्रौद्योगिकी एवं भाषा-प्रबंधन
हिंदी भाषा-साहित्य को प्रौद्योगिकी रूप में सुगठित करना और प्रबंध-विज्ञान के सहारे संपूर्ण देश में उसे कार्यान्वित करना संप्रति बहुत बड़ी चुनौती है। पहली आवश्यकता यह है कि भाषा-प्रौद्योगिकी का एक व्यावहारिक शास्त्र बनाया जाए और फिर उसकी प्रविधि तथा प्रक्रिया का परिविस्तार किया जाए। भारत की भाषा-समस्या का निराकरण विधवा-विलाप से नहीं होगा, बल्कि वह संभव होगा विधेयात्मक वैकल्पिक परिकल्पनाओं से। ऐसी ही कुछ वृहत्तर परिकल्पनाओं से उपजी है यह पुस्तक।
इसमें हिंदी की भाषिक प्रकृति तथा संस्कृति पर विचार करते हुए भाषा के विभिन्न चरित्रों की मीमांसा की गई है। राजभाषा, संपर्क-भाषा, शिक्षण-माध्यम-भाषा, संचार-भाषा और कंप्यूटर-भाषा की शक्ति तथा सीमाओं का विश्लेषण करते हुए यहाँ लेखक ने अनुवाद, वेटिंग, अनुसृजन, पारिभाषिक शब्दावली, संकेताक्षर, दुभाषिया प्रविधि, डबिंग, मीडिया-लेखन, संभाषण-कला, रूपांतरण, सर्जनात्मक लेखन, पत्रकारिता, नाट्यांदोलन, प्रचार- साहित्य-लेखन, कोश-निर्माण, ज्ञान-विज्ञानपरक वैचारिक लेखन, देहभाषा, यांत्रिक भाषा, लोक वाङ्मय, शोध समीक्षा, प्राध्यापन, भाषा-शिक्षण, इतिहास-दर्शन, प्रकाशन, परीक्षण, विपणन, संगोष्ठी-संयोजन, लिपि के मानकीकरण, विभाषाओं के संरक्षण तथा इन विचार-बिंदुओं से जुड़े तमाम पक्षों का बारीक विश्लेषण किया है।
प्रस्तावना, भाषा-प्रौद्योगिकी, भाषा-प्रबंधन और समाहार नामक चार स्तंभों पर आधारित यह कृति हिंदी भाषा-साहित्य का एक नया ढाँचा निर्मित करने हेतु कृतसंकल्प रही है। इसका अनुगमन करते हुए इस ढाँचे को जन-सहभागिता के सहारे भव्य प्रासाद का रूप दिया जा सकता है। यही आह्नान एक-एक अध्याय में किया गया है। अस्तु, यह मात्रा लेखन मात्रा न होकर समग्रतः एक सुनियोजित भाषांदोलन है। एक रचनात्मक महानुष्ठान !

Prof. Surya Prasad Dixit

प्रो० सूर्यप्रसाद दीक्षित
प्रोफेसर व पूर्व अध्यक्ष, हिंदी विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय
जन्म: 6 जुलाई, 1938, बन्नावाँ, रायबरेली (उत्तर प्रदेश)
संस्थापक अध्यक्ष: पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, लखनऊ  विश्वविद्यालय
शोध: छायावादी गद्य (पी-एच० डी०) ०  व्यावहारिक सौंदर्य-शास्त्र (डी० लिट्०)
निर्देशन: हिंदी तथा पत्रकारिता में लगभग 65 पी-एच० डी०, डी० लिट्० 
प्रकाशन: 54 शोध-समीक्षा ग्रंथ एवं लगभग 450 लेख
संपादन: उत्कर्ष, उद्भव, अवधी, ज्ञानशिखा, कुलसंदेश, चाणक्यविचार, साहित्यभारती, संचारश्री आदि।
स्नेहोपहार: उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से ‘साहित्य भूषण’ सम्मान ०  हिंदी साहित्य सम्मेलन से ‘साहित्य वाचस्पति’ की उपाधि ०  इंटरनेशनल सेंटर कैंब्रिज से ‘इंटरनेशनल मैन ऑफ़ दी इयर’ (1998 से 2003 तक) ०  अमेरिकन इंस्टीट्यूट से ‘डिसटिंगिस्ड परसनालिटी ऑफ़ दी वल्र्ड’
संबंधित संस्थाएँ: पूर्व अध्यक्ष, भारतीय हिंदी परिषद्, प्रयाग ०  अध्यक्ष, पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ़ इंडिया, लखनऊ ०  अध्यक्ष, बिहारी पुरस्कार, बिरला फाउंडेशन, नई दिल्ली ०  मंत्री, हिंदी साहित्य सम्मेलन, इलाहाबाद
स्फुट: हिंदी की प्रायः सभी महत्त्वपूर्ण संस्थाओं से संबद्ध  ० देश के 30 विश्वविद्यालयों की पाठ्य समिति, शोध समिति में विशेषज्ञ ०  लगभग 500 सेमिनारों, रेडियो, टी० वी०  में सहभागिता ०  10 देशों का भ्रमण। इन्हीं सेवाओं पर ‘दीक्षागुरु’ (अभिनंदन ग्रंथ), ‘साहित्य- मनीषी’ (समीक्षा) प्रकाशित तथा कई शोध ग्रंथ प्रस्तुत। ‘प्रयोजनमूलक हिंदी’ विषय के पुरस्कर्ता।

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