Zindgi Ka Zaayaka

Sadiq

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  • Year: 2012

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Amarsatya Prakashan

  • ISBN No: 9788188466931

जिंदगी का जायका 
पिछले कई वर्षों से मैं हिंदी ही में ग़ज़लें लिख रहा हूँ। बीच में कभी-कभार यूँ भी होता है कि उर्दू में ग़ज़ल हो जाती है। 1999 की एक रात जब कुछ लिखने का मूड बना और मैंने एक ग़ज़ल लिखी जो हास्य-व्यंग्य से भरपूर थी। फिर उसी मूड में कई दिन तक ऐसी ही ग़ज़लें लिखता रहा। ये ग़ज़लें लिखकर मुझे एक अजीब-सा संतोष मिलता था और ख़ुशी होती थी। ऐसा लगता था कि मैं अपने और अपने समय के बारे में ईमानदारी, सच्चाई और निर्भीकता के साथ वह सभी कुछ लिखता जा रहा हूँ जो कि मुझे लिखना चाहिए। मैंने जब इसका ज़िक्र कमलेश्वर जी से किया तो उन्होंने ‘दैनिक भास्कर’ के रविवारीय परिशिष्ट में हर हफ्ते उनके प्रकाशन का सिलसिला शुरू कर दिया। प्रचलित ग़ज़ल से पृथक् और विशेष पहचान बनाने के लिए ‘हज़ल’ शीर्षक दिया गया और इस तरह काफी समय तक मेरी हज़लें ‘दैनिक भास्कर’ में प्रकाशित होती रहीं और मैं उनमें प्रत्यक्ष रूप से अपने समय का इतिहास रकम करता रहा। फिर अचानक वह मूड ख़त्म हो गया। सिर्फ छपने के लिए लिखते रहना मैंने पसंद नहीं किया। कुछ समय बाद फिर मूड बना तो फिर बहुत-सी ‘ग़ज़लें’ लिख डालीं, जो ‘जिंदगी का ज़ायका’ में शामिल हैं।
-सादिक

Sadiq

सादिक 
जन्म: 1943 (उज्जैन)
शिक्षा: एम० ए०, पी-एच० डी०; (औरंगाबाद, महाराष्ट्र)
प्रकाशित पुस्तकें
हिंदी: ‘गिरते आसमान का बोझ’, ‘सिर पर खड़ा शनि है’, ‘जिंदगी का ज़ायका’ (ग़ज़ल-संग्रह) ०  ‘शब्दों का जन्मदिन’ (कविता-संकलन) ०  ‘दाग़-दाग़ उजाला’ और ‘कालजयी कहानियाँ’ (संपादन और अनुवाद) ०   ‘अज़ीम शइर मिर्ज़ा ग़ालिब’                        ।
उर्दू: ‘दस्तख़त’, ‘सिलसिला’, ‘कुशाद’, ‘ख़्वाब के जलने का मंज़र’ तथा ‘ग़ज़लें नज़्में गर्दालूद’ (शायरी) ०  ‘तरक्कीपसंद तहरीक और उर्दू अफसाना’, ‘अदब के सरोकार’ और ‘चंद मज़ामीन’ (आलोचना) ०  ‘नई मराठी शायरी’, ‘नई हिंदी शायरी’, ‘मालवे की लोक कहानियाँ’, ‘उर्दू के शाहकार अफसाने’ वगै़रह।
हज़ारों रेखांकन उर्दू, हिंदी, अंग्रेज़ी और मराठी पुस्तकों एवं पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित ०  लगभग 70 रेडियो नाटक आकाशवाणी के विभिन्न केंद्रों से बारह भाषाओं में प्रसारित ०  व्यक्तित्व और चित्राकला कृतियों पर आधरित सात वृत्तचित्रा दूरदर्शन (दिल्ली) से प्रसारित।

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