Raahi Ko Samjhaye Kaun

Bal Swaroop Raahi

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  • Year: 2009

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170166948

बालस्वरूप राही हिंदी ग़ज़ल और गीत के एक ऐसे पुख्ताकलम रचनाकार हैं जिन्होंने गत पचास वर्षों में अपनी रचनाओं द्वारा जहाँ एक ओर हिंदी ग़ज़ल और गीत को स्तर, प्रतिष्ठा और एतबार बख्शा है, वहीं दूसरी ओर इन्होंने हिंदी के छंद-काव्य को ऐसे समय में समृद्ध करने का कार्य किया है जब वह विभिन्न काव्यांदोलनों के चलते अपनी साख खोने लगा था। स्पष्ट है कि ये दोनों कार्य अपना विशेष महत्व रखते हैं ।
राही ने पीर, नजीर, गालिब और इकबाल का कलाम पढा है और इन शायरों के बेशुमार अशआर उन्हें कंठस्थ हैं, जिनका प्रयोग वह उचित मौकों पर करते हैं । लेकिन यदि हम राही की शायरी पर इनमें से किसी का प्रभाव तलाश करने का प्रयास करें तो सफलता मिलनी मुमकिन नहीं।  यही कारण है कि राही की गज़लें उनकी अपनी भाषा, शैली और सोच की मज़हर हैं ।
उसकी ग़ज़लें उर्दू ग़ज़ल की परंपरा से अलग एक नई परंपरा की स्थापना करती नजर जाती हैं । निसंस्देह यह एक नई परंपरा है ।
राही की गज़लें हिंदी साहित्य में एक खुशगवार इजाफे की हैसियत और विशेष महत्व रखती हैं ।

Bal Swaroop Raahi

बालस्वरूप राही
जन्म : 16 मई, 1936
जन्म-स्थान : तिमारपुर, दिल्ली
शिक्षा : एम०ए० (हिंदी), दिल्ली विश्वविद्यालय
आजीविका : दिल्ली विश्वविद्यालय में टयूटर, 'सरिता' में अंशकालिक कार्य, 'साप्ताहिक हिंदुस्तान' में सह संपादक (1960-1978), 'प्रोब इंडिया' (इंग्लिश) के संपादक, भारतीय ज्ञानपीठ में सचिव ( 1982- 1990), महाप्रबंधक (हिंदी भवन) ।
प्रकाशन : मेरा रूप तुम्हारा दर्पण, जो नितांत मेरी हैं, जिद बाकी है (गीत-संग्रह), राग-विराग (हिंदी का प्रथम ओपेरा), हमारे लोकप्रिय गीतकार : बालस्वरूप राही ( डॉ. शोरजंग गर्ग द्वारा संपादित), राही को समझाए कौन (ग़ज़ल-संग्रह) । बाल-गीत-संग्रह : दादी अम्मा मुझे बताओ, हम जब होगे बड़े (हिन्दी व अंग्रेजी में) बंद कटोरी मीठा जल, हम सब से आगे निकलेंगे, गाल बने गुब्बारे, सूरज का रथ ।
कतिपय सामान तथा पुरस्कार : प्रकाशबीर शास्वी पुरस्कार, एन.सी.इं.आर.टो. का राष्टीय पुरस्कार, हिन्दी अकादमी द्वारा साहित्यकार सम्मान, अक्षरम् सम्मान, उदूभव सम्मान, जै जै वन्ती सम्मान, परम्परा पुरस्कार, दिल्ली प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन समान, हिन्दू कालेज द्वारा अति विशिष्ट छात्र-सम्मान ।
विशेष : अनेकानेक कवि-गोष्ठियों, कवि-सम्मेलनों आदि में सक्रिय भागीदारी।  रेडियो, टीवी में अनेक कार्यक्रम।  'आकाशवाणी' से एकल काव्य-पाठ और 'साहित्य अकादेमी' में एकल काव्य-पाठ।  आकाशवाणी के सर्वभाषा कवि-सम्मेलन में हिन्दी का प्रतिनिधित्व (2003 ) । टीवी  तथा आकाशवाणी के अनेक वृत्तचित्रों, धारावाहिकों की पटकथा, आलेख तथा गीता संगीत नाटक विभाग के अनेक ध्वनि-प्रकाश कार्यक्रमों के लिए आलेख तथा गीता दूरदर्शन द्वारा कवि पर वृत्तचित्र प्रसारण । डीडी भारती पर अनेक बार प्रसारित 'गूंजते स्वर' (26 लोकप्रिय हिन्दी कवियों पर वृत्तचित्र) की परिकल्पना एवं आलेख।  संसदीय कार्यं मंत्रालय की हिन्दी सलाहकार समिति के सदस्य।

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