Uttar-Samay Main Sahitya

Parmanand Shrivastva

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  • Year: 2010

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Surabhi Prakashan

  • ISBN No: 9789380631059

उत्तर-समय में साहित्य
‘प्रतिरोध की संस्कृति और साहित्य’, ‘अँधेरे समय में शब्द’, ‘अतल का अंतरीप’, ‘उत्तर औपनिवेशिक समय में साहित्य’ के बाद प्रसिद्ध आलोचक परमानंद श्रीवास्तव के पिछले दशक में लिखे कुछ निबंधों का संग्रह है, जिनमें विस्थापन विषयक लेखमाला (पहल : सं. ज्ञानरंजन) के साथ ‘आलोचना’, ‘नया ज्ञानोदय’, ‘कथाक्रम’, ‘जनसत्ता’, ‘राष्ट्रीय सहारा’ आदि पत्रों में प्रकाशित निबंधों के साथ छिटपुट आधे-अधूरे निबंध हैं, जिनकी शृंखला ‘नोटबुक : एक’, ‘नोटबुक : दो’, ‘नोटबुक : 3’ तक जाती है। ‘यूटोपिया का अंत और साहित्य’, ‘हमारे समय में समीक्षा’ पिछले वर्षों के चर्चित निबंध हैं, जिनके केंद्र में है—मतांतर, असहमति।
सब मिलाकर ‘उत्तर-समय में साहित्य’ आलोचना के लोकतंत्र का साक्ष्य है। जहाँ कथा के समाजशास्त्र की चर्चा है, वहीं स्त्री-लेखन को प्रतिरोध की संस्कृति के दायरे में देखा गया है। जहाँ ‘बाजश्रवा के बहाने’ सरीखे क्लासिक का पुनर्पाठ है, वहाँ विधाओं की आवाजाही पर विमर्श भी है। पहला निबंध ‘आज़ादी : साहित्य की आज़ादी’ ‘कथाक्रम’ के लिए ख़ास तौर पर लिखा गया और ‘कथाक्रम’ के विशेष अंक में छपा। 1857 की चर्चा ने इस विषय को प्रासंगिक तो बनाया ही, कई तरह के विवादों को भी जन्म दिया। धार्मिक अस्मिता पर आज के दौर में लिखना भी चुनौती से कम न था, जब इसकी संकीर्ण सांप्रदायिक व्याख्याएँ चलन में थीं। यहाँ पाठक को भी बहस में आमंत्रित करने की पहल है।

Parmanand Shrivastva

परमानंद श्रीवास्तव
10 फरवरी, 1935; बाँसगाँव (गोरखपुर) में जन्म। लंबे समय तक सेंट एंड्रयूज कॉलेज में अध्यापन। 1995 में प्रेमचंद पीठ के प्रोफेसर के रूप में अवकाश प्राप्त 
प्रकाशित कृतियाँ :-
कविता: उजली हँसी के छोर पर, अगली शताब्दी के बारे में, चौथा शब्द, एक अनायक का वृत्तांत, इस बार सपने में तथा अन्य कविताएँ (चयन: अनामिका), प्रतिनिधि कविताएँ (चयन: अरुण कमल)। कहानी: रुका हुआ समय। डायरी: एक विस्थापित की डायरी। साक्षात्कार: मेरे साक्षात्कार। आलोचना: कवि कर्म और काव्य भाषा, शब्द और मनुष्य, कविता का अर्थात, दूसरा सौंदर्यशास्त्र क्यों, कविता का उत्तर-जीवन, उपन्यास का पुनर्जन्म, उपन्यास का यथार्थ और रचनात्मक भाषा, अँधेरे समय में शब्द, प्रतिरोध की संस्कृति और साहित्य, उत्तर समय में साहित्य, उत्तर औपनिवेशिक समय में साहित्य, कहानी की रचना-प्रक्रिया, उपन्यास के विरुद्ध उपन्यास, जैनेन्द्र के उपन्यास, आलोचना का स्वराज, अतल में अंतरीप
सम्मान: साहित्य भूषण सम्मान, द्विजदेव सम्मान, गद्य विध सम्मान (हिंदी अकादमी, दिल्ली); व्यास सम्मान (के.के.बिड़ला फाउंडेशन, नई दिल्ली); भारत भारती सम्मान (उ.प्र. हिंदी संस्थान, लखनऊ)
संपर्क: बी-70, आवास विकास कॉलोनी, सूरजकुंड, गोरखपुर-273015

स्मृति शेष: 5 नवंबर,  2013

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